शिव के तांडव और भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से बने 52 शक्तिपीठ 

52शक्तिपीठ: भारतीय धर्म में शक्तिपीठों का अत्यंत महत्व स्थान है. यह दिव्या स्थल है जहां माता सती के शरीर के विभिन्न अंग गिरे थे, और आज भी इन स्थानों पर माता की अलौकिक शक्ति का अनुभव किया जा सकता है. पुराणों के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होकर माता सती ने प्राणों की आहुति दी. तो भगवान शिव उनके शव को लेकर तांडव करने लगे. इसी दौरान भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के पावन टुकड़े हुए जो विभिन्न स्थानों पर गिरे इन्हीं स्थानों को शक्तिपीठ कहा जाता है.

कैसे हुई शक्तिपीठों की उत्पति

शक्तिपीठों की उत्पत्ति की कहानी पुराणों में वर्णित दक्ष यज्ञ की घटना से जुड़ी हुई है. प्रजापति दक्ष की पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था. दक्ष को अपने दामाद से कोई प्रेम नहीं था, और उन्हें नीची नजर से देखते थे. एक बार दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया और सभी देवताओं को आमंत्रित किया लेकिन, भगवान शिव को जान बूझकर नहीं बुलाया, और जब यह बात सती को पता चली तो वह बिना निमंत्रण के ही यज्ञ में पहुंच गई. वहां दक्ष ने सती और शिव को भरी सभा में अपमानित किया.

अपने पति के होते अपमान को मां सती सहन नहीं कर पाई, और यज्ञ में कूद कर अपने प्राणों की आहुति दे दी. जब भगवान शिव को इस बात का पता चला तो वो क्रोधित होकर यज्ञ स्थल पर पहुंचे और अपने गणों के साथ दक्ष यज्ञ का विध्वंश कर दिया.

सती की मृत्यु से शिवजी बड़े क्रोधित हो गए, और उनके मृत शरीर को कंधे पर उठाकर तांडव करने लगे, और ब्रह्मांड में घूमने लगे. उनका यह तांडव कितना प्रलयकारी था, की पूरी सृष्टि का विनाश होने लगा इस स्थिति को देखकर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 52 भागों में बांट दिया. और जहां-जहां माता सती के 52 अंग गिरे, वो स्थान आज शक्तिपीठ के नाम से कहलाने लगी और उनके साथ वहां शिवजी भैरव के रूप में विराजमान है.

किस जगह पे कौन से अंग गिरे

1. कामाख्या देवी – गुवाहाटी, असम

गिरे अंग: योनि | शक्ति: कामाख्या | भैरव: उमानंद

2. ज्वालामुखी देवी – कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

गिरे अंग: जीभ | शक्ति: सिद्धिदा/अम्बिका | भैरव: उन्मत्त

3. चिंतपूर्णी देवी – चिंतपूर्णी, हिमाचल प्रदेश

गिरे अंग: चरण | शक्ति: चिंतपूर्णी | भैरव: धन्वंतरी

4. नैना देवी – नैनीताल, उत्तराखंड

गिरे अंग: नेत्र | शक्ति: नयना | भैरव: नीलकंठ

5. मनसा देवी – हरिद्वार, उत्तराखंड

गिरे अंग: हस्त | शक्ति: दक्षा/मनसा | भैरव: दधीच

6. कालीघाट काली – कोलकाता, पश्चिम बंगाल

गिरे अंग: दक्षिण पाद अंगुली | शक्ति: कालिका | भैरव: नकुलेश

7. तारापीठ – वीरभूम, पश्चिम बंगाल

गिरे अंग: नेत्र तारा | शक्ति: तारा | भैरव: वामदेव

8. कन्याकुमारी देवी – कन्याकुमारी, तमिलनाडु

गिरे अंग: पृष्ठ (पीठ) | शक्ति: श्रवणी/कुमारी | भैरव: निमिष

9. श्रीशैलम मल्लिकार्जुन – आंध्र प्रदेश

गिरे अंग: ग्रीवा | शक्ति: श्री मल्लिका/ब्रह्मरम्भा | भैरव: सर्वान

10. द्राक्षारामम् – आंध्र प्रदेश

गिरे अंग: बाम कपोल | शक्ति: मणिकर्णी | भैरव: कालाग्निरुद्र

11. वैद्यनाथ धाम – देवघर, झारखंड

गिरे अंग: हृदय | शक्ति: जै दुर्गा | भैरव: वैद्यनाथ

12. उज्जैन महाकाल – उज्जैन, मध्य प्रदेश

गिरे अंग: ऊर्ध्व ओष्ठ | शक्ति: मंगलचंडिका | भैरव: मंगलेश

13. गोकर्ण – कर्नाटक

गिरे अंग: कर्ण | शक्ति: भद्रकाली | भैरव: रुद्र सरकार

14. विराजा देवी – जाजपुर, ओडिशा

गिरे अंग: नाभि | शक्ति: विमला | भैरव: जगन्नाथ

15. त्रिपुर सुंदरी – त्रिपुरा

गिरे अंग: दक्षिण पाद | शक्ति: त्रिपुर सुंदरी | भैरव: त्रिपुरेश

16. कामाक्षी – कांचीपुरम, तमिलनाडु

गिरे अंग: कटि भाग | शक्ति: कामाक्षी | भैरव: एकाम्बरेश्वर

17. श्री पर्वत – आंध्र प्रदेश

गिरे अंग: वाम स्तन | शक्ति: श्री सुनंदा | भैरव: सुनंदनेश्वर

18. ज्योतिष्काली – उत्तराखंड

गिरे अंग: वाम स्तन | शक्ति: महामाया | भैरव: द्रोणेश

19. गुह्येश्वरी – काठमांडू, नेपाल

गिरे अंग: दोनों घुटने | शक्ति: महाशिरा | भैरव: कपाली

20. पूर्णगिरि – तनकपुर, उत्तराखंड

गिरे अंग: नाभि | शक्ति: पूर्णा गिरि | भैरव: गिरीशान

21. मीनाक्षी देवी – मदुरै, तमिलनाडु

गिरे अंग: दक्षिण स्तन | शक्ति: मीनाक्षी | भैरव: सुंदरेश्वर

22. कमलाक्षा देवी – आसाम के निकट

गिरे अंग: वाम नेत्र | शक्ति: घंटाकर्णी | भैरव: धनेश्वर

23. शाकम्भरी देवी – सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

गिरे अंग: शीश | शक्ति: शाकम्भरी | भैरव: चण्डीश

24. भद्रकाली – कुरुक्षेत्र, हरियाणा

गिरे अंग: वाम चक्षु | शक्ति: भद्रकाली | भैरव: चपलेश

25. अम्बिका देवी – अम्बिका, गुजरात

गिरे अंग: हृदय | शक्ति: अम्बिका | भैरव: वामदेव

26. श्रीपुर्वेश्वर – पुरी, ओडिशा

गिरे अंग: नेत्र | शक्ति: विमला | भैरव: श्री जगन्नाथ

27. ज्वालादेवी – गुजरात

गिरे अंग: दक्षिण स्तन | शक्ति: अवंती | भैरव: लम्बोदर

28. इच्छा देवी – इच्छाग्राम, पश्चिम बंगाल

गिरे अंग: हस्त | शक्ति: इच्छा | भैरव: ईश

29. भैरवी – बिहार/झारखंड

गिरे अंग: वाम जंघा | शक्ति: अपर्णा | भैरव: वैरवेश्वर

30. मगध कामेश्वरी – गया, बिहार

गिरे अंग: वक्षस्थल | शक्ति: सर्वमंगला | भैरव: मंगलेश

31. उदयपुर – उदयपुर, त्रिपुरा

गिरे अंग: वाम कर्ण | शक्ति: श्री मतंगिनी | भैरव: श्री मतंग

32. कालरात्रि – अर्धनारीश्वर

गिरे अंग: वाम कूर्पर | शक्ति: कालरात्रि | भैरव: अशनी

33. यशोरेश्वरी – ईशपुर, बांग्लादेश

गिरे अंग: हस्त | शक्ति: यशोरेश्वरी | भैरव: चन्द्र

34. सुगंधा – शिकारपुर, बांग्लादेश

गिरे अंग: नासिका | शक्ति: सुनन्दा | भैरव: त्रयम्बक

35. संकटहरणी – केलूकारी, पश्चिम बंगाल

गिरे अंग: करतल | शक्ति: देवगर्भा | भैरव: देवानंद

36. महालक्ष्मी – कोल्हापुर, महाराष्ट्र

गिरे अंग: त्रिनेत्र | शक्ति: महालक्ष्मी | भैरव: कोरपेश

37. तुलजाभवानी – उस्मानाबाद, महाराष्ट्र

गिरे अंग: ललाट | शक्ति: भवानी | भैरव: भवनाश

38. रेणुका देवी – महुर, महाराष्ट्र

गिरे अंग: वाम भुजा | शक्ति: रेणुका | भैरव: दत्तात्रेय

39. वृंदावन – मथुरा, उत्तर प्रदेश

गिरे अंग: केश पाश | शक्ति: उमा | भैरव: भूतेश

40. श्री सैल – आंध्र प्रदेश

गिरे अंग: गुह्य | शक्ति: ज्वाला मालिनी | भैरव: योगानंद

41. गंगा सागर – सागर द्वीप, पश्चिम बंगाल

गिरे अंग: एड़ी | शक्ति: गंगा | भैरव: समुद्रेश

42. रत्नावली – केदारनाथ, उत्तराखंड

गिरे अंग: दक्षिण कूर्पर | शक्ति: रत्नप्रिया | भैरव: केदारेश

43. मणिकर्णिका – काशी/वाराणसी, उत्तर प्रदेश

गिरे अंग: कर्णावतंस | शक्ति: विशालाक्षी | भैरव: काल भैरव

44. प्रभास – सोमनाथ, गुजरात

गिरे अंग: उदर | शक्ति: चंद्रभागा | भैरव: वक्रतुण्ड

45. करवीर – कोल्हापुर, महाराष्ट्र

गिरे अंग: कूल्हा | शक्ति: महालक्ष्मी | भैरव: क्रोधीश

विदेशों में स्थित शक्ति पीठ

46. हिंगुला देवी – हिंगुलज, बलूचिस्तान (पाकिस्तान)

गिरे अंग: ब्रह्मरन्ध्र | शक्ति: हिंगुला/कोट्टरी | भैरव: भीमलोचन

47. शारदा पीठ – पाक अधिकृत कश्मीर (पाकिस्तान)

गिरे अंग: दक्षिण हस्त | शक्ति: शारदा/सरस्वती | भैरव: दारुकावन

48. चट्टल भवानी – चट्टल, बांग्लादेश

गिरे अंग: दक्षिण भुजा | शक्ति: भवानी | भैरव: चन्द्रशेखर

49. अप्रने – बांग्लादेश

गिरे अंग: वक्षस्थल | शक्ति: अपर्णा | भैरव: शिव

50. लंकाधीश्वरी – त्रिंकोमाली, श्री लंका

गिरे अंग: पाद मूल | शक्ति: इंद्राक्षी | भैरव: रक्षसेश्वर

51. कीरित वास – कीरगंज, बांग्लादेश

गिरे अंग: मुकुट | शक्ति: विमला | भैरव: संवर्त

52. चन्द्रनाथ – चटगांव, बांग्लादेश

गिरे अंग: दक्षिण बाहु | शक्ति: भवानी | भैरव: चन्द्रशेखर

भारतीय धर्म के आध्यात्मिक के अनमोल खजाने में है 52 शक्ति पीठ, यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र है. बल्कि, मानवता को शांति और सकारात्मक प्रदान करने वाले दिव्या स्थलों में से है. माता सती की पवित्र अंगों से निर्मित यह शक्तिपीठ आज भी करोड़ों भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा के अटूट केंद्र है.

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