Bihar assembly election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक ही हैं. और चुनाव की बात करी जाए तो शाहपुर विधानसभा सीट की बात कैसे न हो. शाहाबाद का धान का कटोरा कहा जाने वाला भोजपुर ( आरा) का यह क्षेत्र में जितनी अच्छी धान की उपज है, उतनी ही रोमांचक यह की राजनीति है.
धान के कटोरे का चुनावी इतिहास
पिछले दो दशकों से शाहपुर सीट राष्ट्रीय जनता दल का मजबूत गढ़ रही हैं. लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में शुरू हुई राजद की राजनीति यहां जड़े जमा चुकी हैं. राजद की सीट पर निरंतर सफलता के पीछे कई कारण है. सबसे पहले यह की जातीय संरचना राजद के पक्ष में है. यादव समुदाय का मजबूत आधार यह राजद को फायदा पहुंचाता है.
दूसरी ओर राजद के नेताओं ने यहां जमीनी स्तर पर काम किया है. स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना कृषि संबंधी समस्याओं को समाधान और सामाजिक न्याय की राजनीति ने पार्टी को मजबूत बनाया हैं.
शाहपुर की चुनावी यात्रा को देखे तो यहां हमेशा कांटे की टक्कर रही हैं. पिछले चुनाव में राजद के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. लेकिन, मार्जिन अलग अलग रहा है.
पिछले 2 चुनाव के नतीजे
2015
विजेता उम्मीदवार–राहुल तिवारी (RJD) को 69,315 मत मिले, वही दूसरी ओर विशेेश्वर ओझा (BJP) को 54,745 मत मिले, जीत का मार्जिन 14,570 वोट रहा, लगभग वोट प्रतिशत विजेता का 47.76% और रनर-अप का 37.72% रहा
2020
विजेता उम्मीदवार–राहुल तिवारी (RJD) को 64,393 मत मिले, वही दूसरी ओर शोभा देवी (Independent) को 41,510 मत मिले, जीत का मार्जिन 22,883 वोट रहा लगभग वोट प्रतिशत विजेता का 41.14% और रनर-अप का 26.69% रहा
नई चुनौतियां और संभावनाएं
आने वाले विधानसभा चुनाव में शाहपुर सीट पर कई नए समीकरण नजर आने वाले हैं. राजद के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी क्योंकि पिछले दो चुनाव के नतीजे भले ही राजद के पक्ष में हो पर उनके मार्जिन में ज्यादा अंतर नहीं था. युवाओं में रोजगार की इच्छा और बेहतर जीवन यापन की इच्छा नहीं पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी है साथ ही विपक्षी दलों की एक जूता भी राजद के लिए चुनौती हो सकती हैं.
धान की कटोरा कहे जाने वाले शाहपुर विधानसभा सीट बिहार की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है. 2025 के चुनाव में यहां जो भी परिणाम आए वह न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित करेगा. बल्कि, राज्य की राजनीति पर भी इसका गहरा असर होगा, तो देखना दिलचस्प होगा कि राजद की हैट्रिक की उम्मीदें पूरी होती है, या फिर एक नई पार्टी यह उभर के आती है.