Bihar assembly elections 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आ गए हैं. जमुई जिले में स्थित चकाई विधानसभा सीट एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है. यह सीट जमुई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है और बिहार की राजनीति में अपना विशेष स्थान रखती है. यह मुख्यता ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर करती है. यहां पहाड़ी और मैदानी इलाकों का मिश्रण है जो इसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर बनती है.
चकाई का चुनावी इतिहास
चकाई विधानसभा सीट राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प है या अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीट है लेकिन बाद में से सामान्य सीट में परिवर्तित कर दिया गया. चकाई सेट की एक विशेषता यह रही है कि यह मुख्ता दो परिवारों का राजनीतिक दबदबा रहा है पिछले 15 चुनाव में से 13 जीत इन्हीं परिवारों के नाम रही है इस क्षेत्र की राजनीतिक स्थिरता और पारिवारिक प्रभाव को दर्शाता है. 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद से बिहार की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू ने पहले एनडीए से संबंध तोड़ा फिर महागठबंधन से जुड़े और बाद में पुनः एनडीए में शामिल हो गए, इसी सभी राजनीतिक घटनाओं का प्रभाव चकाई जैसी स्थानीय सीटों पर भी पड़ा है.
पिछले 2 चुनाव के नतीजे
2015
विजेता उम्मीदवार – सावित्री देवी (RJD) को 47,064 मत मिले, वही दूसरी ओर सुमित कुमार सिंह (Independent) को 34,951 मत मिले, जीत का मार्जिन 12,113 वोट रहा, लगभग वोट प्रतिशत विजेता का 31.31% और रनर-अप का 23.25% रहा
2020
विजेता उम्मीदवार – सुमित कुमार सिंह (Independent) को 45,548 मत मिले, वही दूसरी ओर सावित्री देवी (RJD) को 44,967 मत मिले, जीत का मार्जिन 581 वोट रहा,लगभग वोट प्रतिशत विजेता का 24.02% और रनर-अप का 23.71% रहा
अब देखना यह होगा कि चकाई बिहार की राजनीति में क्या स्थान बनाती है. इसका समृद्ध इतिहास स्थिर राजनीतिक परंपरा और विकास की संभावनाएं इस बार बिहार की राजनीतिक मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान रखती है. आने वाले चुनाव में यहां के मतदाताओं की पसंद केवल स्थानीय विकास को प्रभावित करेगी बल्कि राज्य की समग्र राजनीति दिशा में भी योगदान देगी. यह सीट बिहार के ग्रामीण विकास का एक आदर्श मॉडल बन सकती है. अगर सही नीतियों और दृढ़ संकल्प के साथ यहां कार्य किए जाएं.