नवरात्रि के 9 दिन देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। हर दिन का अपना महत्व होता है और हर रूप हमें अलग-अलग शक्ति देता है। इस दौरान बहुत से लोग व्रत रखते हैं और फलाहार करते हैं। व्रत का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ नहीं होता बल्कि मन और शरीर को संयमित करने का भी होता है। यही कारण है कि लोग इन दिनों सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
व्रत सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, सेहत से भी जुड़ा है
नवरात्रि का व्रत केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद खास होता है। अगर सही तरीके से व्रत किया जाए तो यह शरीर को डिटॉक्स करने, पाचन तंत्र को आराम देने और वजन कम करने का सुनहरा अवसर बन सकता है। समस्या तब आती है जब लोग अन्न और नमक छोड़ने के बाद भूख शांत करने के लिए तली-भुनी चीजें, मिठाइयां या बहुत स्टार्च वाली चीजें खा लेते हैं। ऐसे खाने से शरीर हल्का होने की जगह और भारी हो जाता है। नतीजा यह होता है कि वजन बढ़ जाता है, पेट फूलने लगता है और बदहजमी जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
क्यों जरूरी है लो कैलोरी और लो फैट व्रत
त्योहारों के समय हम सभी जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं और यही हमारी सबसे बड़ी गलती होती है। नवरात्रि का असली उद्देश्य शरीर को हल्का करना और पाचन को आराम देना है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि जब हम कम तेल और कम चीनी वाला खाना खाते हैं तो शरीर हल्का महसूस करता है, इंसुलिन और ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है और शरीर में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। अगर ज्यादा तेल या मिठाई खा ली जाए तो फायदा उल्टा हो जाता है। पेट सुस्त हो जाता है, एसिडिटी बढ़ जाती है और वजन भी बढ़ सकता है। इसलिए यह समय सात्विक, हल्का और संतुलित भोजन अपनाने का सबसे अच्छा मौका है।
सात्विक भोजन का मतलब और फायदे
सात्विक भोजन का मतलब है शुद्ध, हल्का और प्राकृतिक खाना। नवरात्रि में प्याज, लहसुन, मांसाहार और पैक्ड फूड से परहेज किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्याज और लहसुन पाचन को भारी बनाते हैं और पेट को आराम नहीं मिलता। इसके बजाय लोग फल, दूध, दही, ड्राई फ्रूट्स और अनाज जैसे कुट्टू, राजगिरा और समा के चावल खाते हैं। ये खाने ग्लूटेन-फ्री होते हैं और इनमें भरपूर प्रोटीन और मिनरल्स पाए जाते हैं। सात्विक भोजन हल्का होता है, यह जल्दी पच जाता है और मूड को भी अच्छा बनाए रखता है।
व्रत की थाली कैसी होनी चाहिए
व्रत की थाली बनाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उसमें कार्ब्स, प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट सब कुछ मौजूद हो लेकिन बहुत ज्यादा तेल और मसाले न हों। कार्ब्स के लिए समा के चावल या कुट्टू की रोटी सही विकल्प हैं। प्रोटीन के लिए लो-फैट पनीर, दही या मूंगफली ली जा सकती है। सब्जियों में लौकी, कद्दू, खीरा और टमाटर जैसे हल्के विकल्प अच्छे रहते हैं। फलों में सेब, पपीता और अनार को शामिल करना फायदेमंद है। फैट के लिए थोड़ा सा घी या कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल इस्तेमाल किया जा सकता है।
व्रत में किन चीजों से बचना चाहिए
व्रत के दौरान सबसे बड़ी गलती तली हुई चीजें खाना होती है। कुट्टू के पकौड़े, आलू के चिप्स या साबुदाने के पापड़ बहुत ज्यादा कैलोरी वाले होते हैं। इसी तरह बहुत ज्यादा मीठी मिठाइयां या क्रीमी डेजर्ट भी सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं। सेंधा नमक का इस्तेमाल करना तो जरूरी है लेकिन इसे भी ज्यादा मात्रा में नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह शरीर में पानी रोकता है और सूजन बढ़ाता है। आलू भी बहुत स्टार्च वाले होते हैं, इसलिए इन्हें कम मात्रा में खाना चाहिए। पैक्ड फूड और बाहर का खाना भी अवॉइड करना जरूरी है क्योंकि इनमें छिपी हुई चीनी और नमक हमारी सेहत बिगाड़ सकते हैं। कई लोग व्रत में बार-बार चाय और कॉफी पीते हैं, लेकिन इससे भी कैलोरी बढ़ती है। इसकी जगह हर्बल टी या नारियल पानी लेना बेहतर है।
एक सैंपल थाली कैसी हो सकती है
अगर आप नवरात्रि में लो कैलोरी थाली बनाना चाहते हैं तो यह करीब 450 से 500 कैलोरी की हो सकती है। इसमें एक कुट्टू या राजगिरा की रोटी, लौकी या कद्दू की हल्की सब्जी, खीरा और टमाटर का सलाद, थोड़ा सा लो-फैट दही मूंगफली के साथ, एक मौसमी फल जैसे पपीता या सेब और एक गिलास छाछ शामिल किया जा सकता है। यह थाली स्वादिष्ट भी है और पेट भरने वाली भी।
कुकिंग स्टाइल से सेहत पर असर
खाने को बनाने का तरीका भी उतना ही जरूरी है। डीप फ्राई करने की बजाय सब्जियों को रोस्ट या स्टीम करना बेहतर है। कुट्टू का चीला बेक करके भी बनाया जा सकता है। साबुदाने की टिक्की को एयर फ्राई करना एक अच्छा विकल्प है। सब्जियों को हल्के घी में बनाया जाए और करी में क्रीम की जगह छाछ डाली जाए तो स्वाद भी बना रहता है और फैट भी 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
व्रत के दौरान हाइड्रेशन
व्रत के दौरान डिहाइड्रेशन से बचना बहुत जरूरी है। अगर पानी कम पिएंगे तो सिरदर्द और थकान हो सकती है। इसलिए रोज कम से कम दो से तीन लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ लेना सबसे अच्छा है। पैक्ड जूस और मीठे ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि इनमें ज्यादा शुगर होती है।
नवरात्रि का व्रत सिर्फ नौ दिनों का नियम नहीं है बल्कि यह हमारी आदतों को बदलने का भी मौका है। अगर हम सही तरीके से व्रत रखें तो लंबे समय में वजन कंट्रोल करना आसान हो जाता है, ब्लड शुगर बैलेंस रहता है, पाचन अच्छा होता है और शरीर मजबूत होता है। वैज्ञानिक रिसर्च भी यही कहती है कि फास्टिंग शरीर को चुस्त रखती है और इम्यूनिटी को बढ़ाती है। इसलिए इस नवरात्रि अगर आप स्मार्ट चॉइस करेंगे तो आपको भक्ति के साथ-साथ अच्छी सेहत का वरदान भी मिलेगा।