JAN SURAAJ: बिहार की राजनीति में एक नया नाम जुड़ गया हैं, प्रशांत किशोर की पत्नी डॉ जाह्नवी दास का, उन्होंने जहानाबाद के जन सुराज के बैठक मैं अचानक प्रवेश किया और सभी को आश्चर्यचकित कर दिया. उनका यह कदम केवल एक औपचारिक उपस्थिति नहीं था, बल्कि उन्होंने एक प्रभावशाली भाषण दे कर वह मौजूदा लोगो को प्रभावित भी कर दिया, विशेष रूप से महिलाओं का उनके प्रति उत्साह कबीले तारीफ था.
डॉ जाह्नवी दास की राजनितिक मंच पर दूसरी उपस्थिति हैं. उससे पहले वो पटना के ज्ञान भवन में जन सुराज के महिला सम्मेलन में नजर आई थी. लेकिन इस बार की उपस्थिति के पीछे एक गहरी रणनीति छुपी हुई लगती है. दूसरी तरफ पार्टी के भीतर प्रशांत किशोर को सुझाव दिए जा रहे हैं कि, स्वयं चुनावी मैदान में न उतरें. यहाँ तक कि तर्क दिया जा रहा है कि, जब पार्टी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ रही है तो, नेता के व्यक्तिगत रूप से चुनाव लड़ना समग्र रणनीति के लिए हानिकारक भी हो सकता.
इसी संदर्भ में डॉ जाह्नवी दास को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है. राजनीतिक हलकों में चर्चा हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वे प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर सकती है. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे. डॉ जाह्नवी दास का पारिवारिक परिचय भी काफी दिलचस्प है. वे मूल रूप से आसाम के गुवाहाटी शहर की निवासी है और प्रशांत किशोर से उनका प्रेम विवाह हुआ था. दोनों का एक पुत्र भी है और वर्तमान में डॉ जाह्नवी अपने बेटे के साथ दिल्ली में रहती हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी, जो उनकी राजनीतिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी का संकेत हो सकता.
कई अवसरों के दौरान प्रशांत किशोर ने अपनी पत्नी के योगदान और समर्थन को स्वीकार किया है. उनके शब्दों में उन्होंने कहा, मैं बहुत भाग्यशाली हूँ की मेरी पत्नी परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही है, जबकि मैं बिहार की गलियों में काम कर रहा हूँ. उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी के सहयोग के बिना यह सब कुछ संभव नहीं हो पाता.
भले ही अभी यह निश्चित रूप से तय नहीं है कि डॉ जाह्नवी दास चुनाव लड़ेंगी या नहीं, लेकिन जन सुराज के प्रत्याशियों के लिए प्रचार अभियान में उनकी सक्रिय भागीदारी निश्चित मानी जा रही है. महिला मतदाताओं के बीच उनकी बढ़त लोकप्रियता पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति साबित हो सकती है. राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि, रणनीतिक सोच एक बार फिर प्रशंसनीय है. समय पर सही निर्णय लेने की कला में वे माहिर हैं. पिछले 3 वर्षों से वे बिहार में बदलाव की मुहिम चला रहे हैं. और इस दौरान उन्होंने राज्य की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी स्थिति बना ली है.
तीसरे विकल्प के रूप में जन सुराज की उपस्थिति ने बिहार के पारंपरिक रणनीति को हिला दिया है. सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा करना कोई सामान्य बात नहीं है, और इसके लिए जो संगठनात्मक क्षमता चाहिए वह राज्य के अन्य राजनीतिक दलों के पास शायद दिखाई नहीं दे रही है. प्रशांत किशोर ने न केवल एक कुशल रणनीतिकार है बल्कि निडर और दृढ़ संकल्पित नेता भी हैं. वर्तमान सर्वेक्षण के अनुसार बिहार के 25% से अधिक मतदाता प्रशांत किशोर और जन स्वराज के समर्थक बनते जा रहे, और यह प्रतिशत चुनाव के नजदीक आते आते और भी बढ़ रहा.
कुल मिलाकर डॉ जाह्नवी दास का राजनीतिक मंच पर प्रवेश बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है, और सभी को इसके परिणामों का इंतजार है.