Bihar assembly election 2025: बिहार के मगध क्षेत्र की सबसे बहुचर्चित सीट। जहानाबाद को राजनीतिक जानकार राजद का अजय किला भी मानते हैं. यह जहानाबाद जिले की सबसे प्रभावशाली सीट है और जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है. यहां की राजनीति का केंद्र यादव समुदाय है जो राजद की ताकत का मुख्य स्त्रोत माना जाता है. पिछले 2 दशकों से यहां राजद और जेडीयू के बीच रोमांचक मुकाबला होता आया है लेकिन, 2015 के बाद यह सीट राजद के खाते में ही रही है.
चुनावी इतिहास
जहानाबाद विधानसभा का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है कभी वामपंथी का गढ़ रहा या क्षेत्र अब राजद और जदयू के बीच सत्ता संघर्ष का केंद्र बन गया है. जहां 2020 विधानसभा चुनाव में राजद के उदय यादव ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था उन्होंने 75,030 वोट लेकर जेडीयू के कृष्णानंद प्रसाद वर्मा को 33,902 वोटो के भारी अंतर से हराया था.
वही 2015 में भी राजद की ही जीत हुई थी, जब मुंद्रिका सिंह यादव ने 76458 वोट लेकर आरएलएसपी के प्रवीण कुमार को 3321 वोटो के अंतर से हराया था. मां गठबंधन के उसे दौर में राजद की यह जीत काफी महत्वपूर्ण थी. क्योंकि, इससे पहले 2010 में ये सीट जेडीयू के खाते में गई थी. जबकि 2005 में राजद ने जीत हासिल की थी. यही दिखता है कि यह राजद और जदयू के बीच कड़ी टक्कर होती आई है.
क्या बदल सकते हैं समीकरण?
राजद की मजबूती के बावजूद 2025 का चुनाव आसान नहीं होगा. नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी के बाद राजनीतिक समीकरण बदले हैं. जेडीयू अब केंद्र सरकार के साथ मिलकर विकास का एजेंडा लेकर आ सकती है. मुख्य चुनौती यह होगी कि क्या एनडीए गैर यादव वोटो को एकजुट कर सकता है, और राजद के पारंपरिक वोट बैंक में चेंज ला सकता है. राजद के लिए फायदा यह है कि यहां यादव समुदाय की संख्या सबसे ज्यादा है और वह पारंपरिक रूप से लालू तेजस्वी के साथ खड़े रहते हैं. अब देखना होगा इस बार की लड़ाई तय करेगी कि राजद का 10 साल का जादू कायम रहेगा या फिर जेडीयू वापसी करेगा.
इस बार के मुद्दे
बेरोजगारी और युवाओं का पलायन इस बार विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है. जहानाबाद के हजारों युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली मुंबई जा रहे हैं. कृषि संकट भी एक जलता मुद्दा है. धान और गेहूं की फसल में नुकसान, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति में चुनावी बहस का केंद्र सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दवाओं की किल्लत जैसे मुद्दे स्थानीय जनता को परेशान कर रहे हैं. वहीं बिजली पानी की समस्या गर्मियों में 12–14 घंटे कटौती यह सब आम संकट है, सड़कों की खराब हालत और परिवहन व्यवस्था की कमी भी महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे हो सकते हैं.
चुनावी आंकड़े
वोटर टर्नआउट की बात करें तो जहानाबाद में पारंपरिक रूप से 55 से 60% वोटिंग होती है 2020 में कुल 1,66,083 वैध वोट पड़े थे. नोट का फैक्टर भी महत्वपूर्ण रखता है पिछले चुनाव में 1247 वोट नोटा को मिले थे. महिला वोटरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अब यह कुल वोटर लिस्ट का 48% है जो चुनावी नतीजे को प्रभावित कर सकता है.
जहानाबाद आज भी राजद का गढ़ हैं. लेकिन, 2025 का चुनवा इतिहास बदल सकता है. राजद के पास पारंपरिक वोट बैंक जरूर हैं लेकिन, एनडीए के पास विकास का एजेंडे, केंद्र सरकार की योजनाओं का फायदा ओर नीतीश कुमार की साख हैं. ये चुनाव बताएगा कि राजद अपना 10 साल का जादू कायम रख पाएगी या फिर एनडीए इस यादव गढ़ को फतह कर लेगी? यह सवाल ही 2025 बिहार चुनाव की सबसे दिलचस्प कहानी हो सकती है.