Rajauli vidhanshabha seat: बिहार में अक्टूबर नवंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. और उसकी तैयारी जोरों से चल रही है. वहीं बिहार के नवादा जिले की रजौली विधानसभा सीट ऐसी सीट है जहां पिछले 7 दशकों का राजनीतिक इतिहास खुद ब खुद बयां हो जाता है. 1952 में अस्तित्व में आई इस सीट ने कांग्रेस के उत्थान उसके पतन और फिर क्षेत्र दलों के उपहार को बहुत करीब से देखा है सबसे दिलचस्प बात यह है कि 1972 के बाद से कांग्रेस यहां एक बार भी नहीं जीत पाई है.
चुनावी इतिहास
रजौली विधानसभा सीट की चुनावी इतिहास काफी दिलचस्प है. जहां पहले चुनाव का नतीजा बेहद दिलचस्प था 1952 का चुनाव रजौली के लिए खास रहा था. क्योंकि इस सीट से दो विधायक चुने गए थे महावीर चौधरी और राधा कृष्ण सिंह प्रसाद दोनों ही कांग्रेस के थे, और उसे दौर में पार्टी का जबरदस्त जनाधार था, फिर 1952 से लेकर 1972 तक कांग्रेस का स्वर्णिम दौड़ चला. जहां कांग्रेस के रामस्वरूप प्रसाद यादव ने 1957 में जीत दर्ज की फिर वही रामस्वरूप प्रसाद दोबारा विधायक बने 1962 में, उसके बाद शांति देवी ने 1967 में कांग्रेस के लिए मात्र 146 वोटो से जीत हासिल की थी फिर 1972 में बनवारी राम ने कांग्रेस को जिताया था. कांग्रेस के स्वर्णिम दौर के बीच में 1969 में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार जन संघ के बाबूलाल ने जीत हासिल की थी. फिर 1985 का चुनाव काफी दिलचस्प रहा बनवारी राम ने जो पहले कांग्रेस के थे उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. फिर 1990 के बाद भाजपा और राजद का दबदबा कायम राजा 1990 में भाजपा के बाबूलाल ने कांग्रेस के बनवारी राम को 4180 वोटो से हराया था, फिर 2000 में राजद को पहली बार जीत मिली थी 2005 में नंदकिशोर चौधरी ने राजद के जीत हासिल की थी वही 2005 के दोबारा विधानसभा चुनाव में भाजपा के बनवारी राम को जीत मिली.
पिछले 2 विधानसभा चुनाव के नतीजे
2015
विजेता उम्मीदवार – प्रकाश वीर (RJD) को 70,549 मत मिले, वही दूसरी ओर अर्जुन राम (BJP) को 65,934 मत मिले, जीत का मार्जिन 4,615 वोट रहा, लगभग वोट प्रतिशत विजेता का 42.10% और रनर-अप का 39.35% रहा.
2020
विजेता उम्मीदवार – प्रकाश वीर (RJD) को 69,984 मत मिले, वही दूसरी ओर कन्हैया कुमार (BJP) को 57,391 मत मिले, जीत का मार्जिन 12,593 वोट रहा, लगभग वोट प्रतिशत विजेता का 41.72% और रनर-अप का 34.16% रहा.
2025 का चुनावी समीकरण
रजौली सीट पर अब नजर 2025 के विधानसभा चुनाव पर है. पिछले तीन दशकों का नतीजा देखें तो बीजेपी ने यहां कई बार जीत हासिल की है, राजद ने पिछले दो चुनाव में लगातार जीत दर्ज की है. वहीं कांग्रेस 53 सालों से यह जीत नहीं पाई है.
2025 के चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजद अपनी जीत की हैट्रिक पूरी कर पाती है, या बीजेपी एनडीए गठबंधन यहां वापसी करती है.