क्या है सर क्रीक विवाद…जिस पर भारत ने पाकिस्तान को दी चेतावनी, जानें क्यों अहम है ये दोनों देश के बीच दलदली इलाका

Sir Creek dispute : आज़ादी के 78 साल बाद भी सर क्रीक विवाद को हवा दी जा रही है. भारत ने बातचीत के ज़रिए इस विवाद को सुलझाने की कई कोशिशें की हैं लेकिन पाकिस्तान की नीयत साफ़ नहीं है. अगर पाकिस्तान इस क्षेत्र में किसी तरह का दुस्साहस करता है तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे…ये बयान है भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का. भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के कच्छ में विजयादशमी के मौके पर आयोजित शस्त्र पूजा कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने सर क्रीक से सटे इलाकों में सैन्य ढांचे का विस्तार किया है, जो उसकी मंशा को दर्शाता है. रक्षा मंत्री की इस चेतावनी के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि सर क्रीक विवाद है क्या, दोनों देशों के लिए यह इतना अहम क्यों है और अब तक यह हल क्यों नहीं हो पाया है?

क्या है सर क्रीक विवाद

क्रीक का अर्थ होता है समुद्र में मौजूद संकरी खाड़ी. सर क्रीक एक 96 किलोमीटर लंबा दलदली इलाका है, जो भारत के गुजरात के कच्छ जिले और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच स्थित है. यह अरब सागर से जुड़ा हुआ है. पहले इसका नाम बनगंगा था, ब्रिटिश काल में इसे सर क्रीक कहा जाने लगा. यह इलाका हमेशा से विवादों में रहा क्योंकि यहां की सीमा तय करने को लेकर भारत और पाकिस्तान की राय अलग-अलग है.

क्यों हो रहा विवाद

सर क्रीक विवाद की जड़ 1914 में ब्रिटिश शासन के समय लिए गए एक फैसले से जुड़ी है. 1913-14 में हुए सर्वेक्षण के बाद बॉम्बे प्रेसीडेंसी ने कहा कि सर क्रीक दलदली इलाका है और यहां जहाज नहीं चल सकते, इसलिए इसकी सीमा खाड़ी के बीच से नहीं, बल्कि पूर्वी किनारे (ईस्टर्न बैंक) से तय की जाएगी. इसका नतीजा यह हुआ कि सर क्रीक का पूरा इलाका सिंध (आज का पाकिस्तान) के हिस्से में चला गया. आज़ादी के बाद भारत ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि सीमा खाड़ी के बीच से तय होनी चाहिए.

भारत ने इसके समर्थन में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और यूएनसीएलओएस (United Nations Convention on the Law of the Sea) के तहत थालवेग सिद्धांत का हवाला दिया. इस सिद्धांत के मुताबिक अगर कोई नदी या खाड़ी दो देशों के बीच है तो सामान्यतः सीमा उसके बीच से तय होगी. पाकिस्तान का तर्क है कि चूंकि सर क्रीक दलदली है और जहाजों के चलने लायक नहीं है, इसलिए थालवेग सिद्धांत लागू नहीं होता.भारत का कहना है कि यहां ज्वार-भाटा (टाइड्स) आते हैं, जिससे जहाज गुजर सकते हैं, इसलिए इसे नौगम्य (नैविगेबल) मानकर सीमा बीच से तय होनी चाहिए.

क्यों अहम है यह इलाका

सर क्रीक का महत्व सिर्फ भौगोलिक विवाद तक सीमित नहीं है, इसके पीछे आर्थिक, सामरिक और रणनीतिक कारण भी हैं. अगर सीमा खाड़ी के बीच से मानी जाती है तो भारत को समुद्र का बड़ा हिस्सा मिलता है, जबकि पाकिस्तान को लाभ तभी होगा जब सीमा किनारे से तय हो. यह इलाका तेल और प्राकृतिक गैस जैसे संसाधनों से समृद्ध माना जाता है. एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) और समुद्र के नीचे के संसाधनों पर अधिकार तय करने में इसका सीधा असर है. मछुआरों के लिए भी यह इलाका अहम है. अक्सर मछुआरे अनजाने में दूसरे देश के जलक्षेत्र में चले जाते हैं, जिससे उन्हें गिरफ्तार किया जाता है. पाकिस्तान का लेफ्ट बैंक आउटफॉल ड्रेन (LBOD) प्रोजेक्ट भी विवाद को बढ़ाता है, क्योंकि इसके जरिए पाकिस्तान खारा और औद्योगिक पानी सर क्रीक में डालता है, जिससे पर्यावरणीय खतरे और बाढ़ की समस्या पैदा होती है.

विवाद सुलझाने की कोशिशें भी हुई हैं

भारत और पाकिस्तान दोनों यूएनसीएलओएस के सदस्य हैं. इस संधि के मुताबिक सदस्य देशों को अपने समुद्री विवाद 2009 तक सुलझाने थे, वरना विवादित क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र घोषित किया जा सकता था. 1995 और 2005 में दोनों देशों के बीच बातचीत के सकारात्मक दौर हुए, लेकिन वे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके. 2015 तक कई दौर की बातचीत हो चुकी थी, लेकिन सर क्रीक विवाद जस का तस बना रहा. भारत का रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस विवाद का समाधान द्विपक्षीय संवाद से ही संभव है.

क्या है मौजूदा स्थिति और बढ़ती चिंता

सर क्रीक विवाद आज भी भारत-पाकिस्तान रिश्तों में तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है. यह इलाका न सिर्फ रणनीतिक दृष्टि से अहम है बल्कि यहां के समुद्री संसाधन भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं. रक्षा मंत्री की चेतावनी बताती है कि मौजूदा हालात में यह विवाद फिर से सुरक्षा और कूटनीति दोनों के केंद्र में आ गया है. सवाल यह है कि क्या दोनों देश अपने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान खोज पाएंगे या यह मसला आने वाले वर्षों में भी सीमा पर तनाव बनाए रखेगा.

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