Nalanda vidhansabha seat: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 दो चरणों में होंगे पहले चरण की मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण के मतदान 11 नवंबर को होने वाली है. वोटो की गिनती 14 नवंबर को होगी, बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से नालंदा एक महत्वपूर्ण सीट है. जहां बीजेपी, जेडीयू, लोजपा और राजद कांग्रेस गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है. मतदाता संख्या की बात करें तो 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां 3,10,070 मतदाता थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 3,26,659 हो गए, 2025 की चुनाव सूची में इसमें और वृद्धि की संभावना है.
अगर नालंदा की बात करें तो नाम सुनते ही प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की छवि सामने आ जाती है. जो एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है. प्रसिद्ध इतिहासकार विलियम डालरिंपल ने इसे अपने समय का “हॉवर्ड ऑक्सीब्रिस और नासा” कहा है.
हालांकि राजनीतिक रूप से नालंदा विधानसभा सीट 1977 में अस्तित्व में आए नालंदा जिला 1972 में पटना से अलग करके बनाया गया था, जबकि इसकी प्रशासनिक राजधानी बिहार शरीफ एक अलग विधानसभा सीट है.
नालंदा सीट की शुरुआती वर्षों में कांग्रेस का दबदबा बना रहा था. कांग्रेस नेता श्याम सुंदर प्रसाद और निर्दलीय उम्मीदवार रामनरेश सिंह के बीच बारी-बारी से जीत दर्ज होती रही थी. दोनों ने पहले के चुनाव में दो-दो बार जीत हासिल की, कांग्रेस नेता श्याम सुंदर सिंह तीन बार नालंदा से विधायक रहे, फिर 1996 के बाद नालंदा की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया जब नीतीश कुमार का राजनीतिक प्रभाव बढ़ने लगा, तब से श्रवण कुमार ने जनता दल यूनाइटेड और उसके पूर्ववर्ती दल समता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लगातार सात बार जीत हासिल की, श्रवण कुमार वर्तमान में नीतीश कुमार की सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं. उनकी जीत हमेशा भारी अंतर से हुई है सिवाय 2015 के जब उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार को मात्र 3000 से कम वोटो के अंतर से हराया था, और वहीं अगर 2020 विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद करें तो श्रवण कुमार में जेटीबीपी के कौशलेंद्र कुमार को 15,878 वोटो से हराया था.
नीतीश कुमार का प्रभाव इतना गहरा है कि 1996 से 2004 के बीच तीन बार जॉर्ज फर्नांडिस नालंदा लोकसभा सीट से सांसद बने. हालांकि वे इस क्षेत्र के लिए पूरी तरह बाहरी व्यक्ति थे, लेकिन नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी होने के कारण उन्हें जीत हासिल हुई जनता दल यूनाइटेड और उसकी पूर्ववर्ती समता पार्टी ने 1996 में नालंदा लोकसभा सीट पर लगातार नौ चुनाव जीते थे.
नालंदा विधानसभा सीट को जनता दल यूनाइटेड का अजय गढ़ माना जाता है. श्रवण कुमार लगातार सात बार विधायक रहे और बिहार सरकार में मंत्री भी, हालांकि इस बार चुनाव में कई कारक महत्वपूर्ण होंगे, जैसे बिहार के अन्य हिस्सों में नीतीश कुमार के लोकप्रियता में कुछ गिरावट देखी गई है, लेकिन नालंदा में उनकी पकड़ अभी भी मजबूत मानी जाती है. दूसरी तरफ राजद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मिलकर एनडीए चुनौती देने के तैयारी में है.
नालंदा विधानसभा सीट की राजनीति नीतीश कुमार की विरासत और जातिगत समीकरणों से गहराई से जुड़ी हुई है. 1996 से यह सीट जदयू और समता पार्टी का गढ़ बनी हुई है, 6 और 11 नवंबर को होने वाले मतदान में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या श्रवण कुमार अपनी लगातार आठवीं जीत दर्ज कर पाते हैं, या विपक्षी गठबंधन जदयू के इस गढ़ को ध्वस्त करने में सफल हो जाते हैं.