कैसे बना महिला शक्ति का गढ़, बाराचट्टी विधानसभा सीट ?

Barachatti vidhansabha seat: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर है. गया जिले की बाराचट्टी विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन रही है. यह अनुसूचित जाति आरक्षित सीट पिछले कुछ सालों से महिला नेतृत्व का प्रतीक बन चुकी है. 14 नवंबर 2025 को होने वाली वोटो की गिनती से पहले लिए जानते हैं इस सीट का पूरा राजनीतिक समीकरण.

बाराचट्टी की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री जितेंद्र राम मांझी के परिवार की गहरी पकड़ है. जीतन राम मांझी ने खुद दो बार 1996 और 2005 में इस सीट से जीत अपने नाम की थी. उनकी समधन ज्योति देवी ने भी दो बार यहां से चुनाव जीत जिसमें 2020 की जीत सबसे ताजा है.हिंदुस्तानी आता मोर्चा (सेकुलर) के टिकट पर लड़ी ज्योति देवी ने 2020 में राजद की समता देवी को करारी शिकस्त दी थी.

बात करें पिछले दो विधानसभा चुनाव की तो 2020 के विधानसभा चुनाव में बाराचट्टी सीट पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला था. इस चुनाव की खासियत यह थी कि चारों प्रत्याशी महिलाएं ही थी. हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेकुलर) की ज्योति देवी ने 72,491 वोट हासिल कर जीत अपने नाम की, उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की मजबूत प्रत्याशी समता देवी को 6,318 वोटो के अंतर से पराजित किया समता देवी को 66,173 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर रही लोग जनशक्ति पार्टी की रेणुका देवी को 11244 वोट मिले.

वही 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में संता देवी ने शानदार जीत हासिल की थी राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर लड़ी समता देवी ने लोक जनशक्ति पार्टी की सुधा देवी को 19,126 वोटो के बड़े अंतर से हराया था.

2024 के लोकसभा चुनाव में गया सीट में से जितन राम मांझी ने शानदार जीत हासिल की थी. हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेकुलर) के मांझी ने राष्ट्रीय जनता दल के कुमार सर्वजीत को 1,01,812 वोटो के विशाल अंतर से हराया था. ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र बाराचट्टी जहां कोई शहरी मतदाता नहीं है, 2020 में यहां कुल 3,04,389 मतदाता पंजीकृत थे,जो 2024 में बढ़कर 3,15,036 हो गए.

इस बार के चुनाव में कई नए समीकरण बन सकते हैं. एक तरफ एनडीए गठबंधन में बीजेपी जेडीयू और लोजपा है. तो दूसरी तरफ महागठबंधन में राजद और कांग्रेस मैदान में है. लेकिन इस बार की सबसे बड़ी चुनौती चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुरज और राजद से निष्कासित हुए तेज प्रताप यादव की एंट्री है.

पिछले दो चुनाव में महिला प्रत्याशियों का दबदबा रहा है, इसीलिए इस बार महिला मतदाताओं की राय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, की अब यह सीट न केवल गया जिले बल्कि पूरे बिहार के राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है. 14 नवंबर को होने वाली मतगणना में साफ हो जाएगा की जनता किसके तरफ खड़ी है

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