बीजेपी के 35 साल पुराने गढ़ में इस बार सबसे बड़ी परीक्षा, प्रेम कुमार के बिना क्या रहेगी पार्टी की रणनीति? 

Gaya Town vidhanshabhah seat: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के साथ ही ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी गया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. गया टाउन विधानसभा सीट जो पिछले 35 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला है. इस बार अपने इतिहास की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करने जा रहा है. 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होने वाले मतदान में गया टाउन दूसरे चरण में शामिल है, और 14 नवंबर को वोटो की गिनती होगी

गया टाउन की राजनीति में प्रेम कुमार का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है. 1990 से लेकर 2020 तक लगातार आठ बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले प्रेम कुमार ने इस सीट को बीजेपी का पर्याय बना दिया है. उनकी यह उपलब्धि न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में दुर्लभ है. वरिष्ठ नेता और मंत्री के रूप में उन्होंने गया शहर के विकास के महत्वपूर्ण योगदान दिया है. प्रेम कुमार की सफलता का राज उनका जमीनी संपर्क, कायस्थ समुदाय के बीच प्रभाव और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना रहा है. 2020 के चुनाव में उन्होंने 66,362 वोट प्राप्त कर कांग्रेस के अघोरी ओंकार नाथ को 12,130 वोटो से हराया था.

अगर बात करें पिछले दो विधानसभा चुनाव की तो 2020 का विधानसभा चुनाव प्रेम कुमार के लिए सबसे मुश्किल साबित हुआ, कांग्रेस के अघोरी ओंकार नाथ ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी. अंतिम परिणाम यह हुआ की प्रेम कुमार 12,123 वोटो के अंतर से विजय प्राप्त किया. यह परिणाम बीजेपी के चेतावनी की घंटी था महागठबंधन की लहर की बावजूद प्रेम कुमार की व्यक्तिगत लोकप्रियता ने उन्हें जीत दिलाई थी. वहीं 2015 का विधानसभा चुनाव में महागठबंधन जेडीयू राजद कांग्रेस के ऐतिहासिक जीत के लिए याद किया जाता है पूरे बिहार में एनडीए करारी हार मिली थी लेकिन गया टाउन में प्रेम कुमार ने अपना गढ़ बचाए था.

2024 के लोकसभा चुनाव में हम पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री श्री जीतन राम मांझी ने गया लोकसभा सीट से शानदार जीत हासिल की थी. गया टाउन विधानसभा क्षेत्र में उन्हें 31000 से अधिक वोटो की बढ़त मिली थी. यह एनडीए की मजबूती का संकेत था, शहरी क्षेत्र होने के नाते गया टाउन में स्थानीय विकास के मुद्दे सर्वोपरि है, सड़कों की खस्ताहाल स्थिति अवस्थित जल निकासी, बिजली, पानी की अनियमित आपूर्ति जैसे मुद्दे मतदाताओं की प्रमुख चिंताएं हैं, विपक्ष इतनी मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाती आ रही है.

गया टाउन विधानसभा सीट 2025 के चुनाव में बिहार की सबसे दिलचस्प सीटों में से एक साबित होगी, भाजपा के 35 साल के प्रभुत्व को गंभीर चुनौती मिलेगी, या यह गढ़ अभेद्य बना रहेगा, यह 14 नवंबर को परिणाम के साथ स्पष्ट होगा. एक बात तय है, गया टाउन का यह चुनाव न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि बिहार की समग्र राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है.

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