2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व पे आई इस सीट की राजनीति के उल्ट फेर में फंसे महागठबंधन ओर एनडीए…!

Hathua vidhanshabha seat: बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित हथुआ विधानसभा सीट राजनीतिक उठक पाठक का गवाह रही है. 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और तब से यहां की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. ऐतिहासिक रूप से हथवा महाराज के लिए प्रसिद्ध है, इस क्षेत्र में अब चुनावी रण की तैयारियां जोरों पर है. हथवा से वर्तमान विधायक राजेश कुमार सिंह है जिन्हें राजेश सिंह कुशवाहा के नाम से भी जाना जाता है. वे राष्ट्रीय जनता दल राजद के नेता हैं और 2020 के चुनाव में शानदार जीत आपने नाम दर्ज की थी.

2020 के विधानसभा चुनाव में हथवा सीट पर राजद के राजेश कुमार सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया, उन्होंने जदयू के रामसेवक सिंह को 30000 वोटो के भारी अंतर से हराया था. इस चुनाव में कुल 16 उम्मीदवार मैदान पर थे. दिलचस्प बात यह रही की नोटा चौथे स्थान पर रहा और उसे 4000 से अधिक वोट मिले. वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में हथवा सीट पर जदयू के रामसेवक सिंह की ने जीत हासिल की थी उन्होंने हम पार्टी के महाचंद्र सिंह को हराया था.

हथवा विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या बेहद महत्वपूर्ण है. यह सर्वाधिक संख्या में मुस्लिम मतदाता है, जो चुनावी समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं. इसके बाद दलित मतदाताओं की संख्या आती है, यह सीट जनरल कैटेगरी की है, लेकिन इसकी सामाजिक संरचना विविधतापूर्ण है.

बिहार में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी पूरी तरह शुरू हो चुकी है. हथवा सीट के लिए निर्वाचन अधिकारी अनुमंडल पदाधिकारी अभिषेक कुमार चंदन की अध्यक्षता में अनुमंडल कार्यालय सभागार में चुनाव संबंधी विभागों के पदाधिकारी की बैठक हुई है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सभी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पारदर्शी तारीख से संपन्न कराई जाए.

हथवा सीट पर इस बार बीजेपी रेडियो लोक जनशक्ति पार्टी गठबंधन और राजद कांग्रेस गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है. मौजूदा विधायक राजेश सिंह की लोकप्रियता और उनके विकास कार्यो का असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है. साथ ही मुस्लिम दलित समीकरण इस बार भी निर्णायक साबित हो सकते हैं.

हथवा विधानसभा सीट बिहार की उन चुनावी सीटों में से है, जहां राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. 2015 में जदयू की जीत और फिर 2020 में राजद की वापसी इस बात का सबूत है, कि यहां की जनता अपना फैसला सोच समझकर करती है. 14 नवंबर को आने वाले नतीजे तय करेंगे, कि क्या राजेश सिंह एक बार फिर जनता का विश्वास जीतते हैं, या फिर जदयू सत्ता में वापसी करेगी..!

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