नाराज पप्पू सिंह को भाजपा ने कैसे मनाया..अलीनगर में मैथिली की जीत अब पक्की !

Bihar assembly election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट बंटवारे की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी ने प्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर को अलीनगर सीट से उम्मीदवार बनाकर उनकी सेलिब्रिटी अपील का फायदा उठाने की योजना बनाई है। लेकिन इस फैसले ने पार्टी के भीतर ही विद्रोह की स्थिति पैदा कर दी, जिसे संभालने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खुद मैदान में उतरना पड़ा।

अमित शाह का हस्तक्षेप और संजय कुमार सिंह का यू टर्न

मैथिली ठाकुर के टिकट मिलने के बाद स्थानीय नेता संजय कुमार सिंह उर्फ पप्पू ने खुलकर विरोध किया उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था। हालांकि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने रात में ही उन्हें पटना बुलाया, इस हाई प्रोफाइल बैठक में राष्ट्रीय महासचिव धर्मेंद्र प्रधान और सह प्रभारी सम्राट चौधरी भी मौजूद थे। इस बैठक के बाद संजय कुमार सिंह का रुख पूरी तरह बदल गया, उन्होंने अपना फैसला वापस लेते हुए कहा कि उन्होंने यह फैसला अलीनगर के हित में एवं हिंदुत्व की आत्मरक्षा वह मान मर्यादाओं को बचाए रखने के लिए लिया है, और वह संगठन के साथ है।

दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले ही संजय कुमार सिंह ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था, कि मैथिली ठाकुर के काम में व्यस्त रहने पर गालियां तो मुझे ही सुननी पड़ेगी, क्योंकि उनका मूल पैसा तो संगीत है, और वह जमीनी काम नहीं कर पाएंगी। अमित शाह की दखल के बाद संजय कुमार सिंह ने न केवल चुनाव लड़ने का इरादा छोड़ दिया, बल्कि मैथिली ठाकुर के प्रचार में सहयोग के लिए अपनी टीम की बैठक भी बुला ली।

सीटिंग विधायकों का इस्तीफा

अलीनगर सीट से भाजपा के सिटिंग विधायक मिश्रीलाल यादव को भी टिकट कटने से गहरा झटका लगा। निराशा मिश्रीलाल यादव ने सोशल मीडिया पर पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए लिखा, आज लोकप्रियता जीत गई और संघर्ष हार गया। एक सिटिंग विधायक का पार्टी छोड़ने पर भाजपा की आंतरिक एकता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

सेलिब्रिटी पॉलिटिक्स बनाम ग्राउंड वर्कर

इस पूरे बवाल ने राजनीतिक दलों द्वारा स्थानीय कार्यकर्ताओं और जमीन नेताओं की उपेक्षा और सेलिब्रिटी चेहरों की तरजीह देने की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा की योजना स्पष्ट है, कि मैथिली ठाकुर की लोकप्रियता और युवा अपील का इस्तेमाल करके वह पूरे बिहार में पार्टी की पहुंच बढ़ाना चाहती हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि स्थानीय नेता और कार्यकर्ता ही चुनाव जीतने की असली ताकत होते हैं, उनकी उपेक्षा पार्टी के लिए महंगी साबित हो सकती है।

अमित शाह की दर्जन भर बैठक

सूत्रों के अनुसार, संजय कुमार सिंह के अलावा, अमित शाह ने बिहार के एक दर्जन से अधिक नाराज भाजपा नेताओं से मुलाकात की है, जो टिकट बंटवारे से असंतुष्ट होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे। यह स्थिति दर्शाती है कि टिकट वितरण में गंभीर खामियां रही हैं और पार्टी के भीतर असंतोष व्यापक है।

भाजपा के रणनीति पर सवाल

मैथिली ठाकुर के मामले में भाजपा की रणनीति पर कई सवाल खड़े किए गए हैं।

1. पार्टी ने उनके सेलिब्रिटी अपील को भुनाने की योजना बनाई लेकिन खुद उनकी एक सीट बचाने के लिए गृह मंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा कौन।

2.सेटिंग विधायक और स्थानीय नेताओं की अनदेखी कर दी गई जो जमीनी स्तर पर पार्टी की रीढ़ है।

3. अगर हर सेलिब्रिटी उम्मीदवार के लिए इतने उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी तो यह स्ट्रेटजी कितनी कारगर है?

सेलिब्रिटी पॉलिटिक्स की सीमाएं

मैथिली ठाकुर विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल सेलिब्रिटी अपील चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त नहीं होती, जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्थन स्थानीय समीकरण की समझ, पार्टी संगठन की मजबूती भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। भाजपा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अपने नाराज नेताओं को मानते हुए मैथिली ठाकुर जैसे नए चेहरे को सफलतापूर्वक चुनाव जीत पाए। यह देखना होगा कि क्या पार्टी संतुलन को साध पाती है, या फिर यह विवाद चुनाव परिणामों को प्रभावित करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *