दीपावली… अलग अलग नाम से क्यों मनाया जाता है रौशनी का उत्सव, जानिए कहां क्या है परंपरा?

Diwali with unique Name in other countries: रोशनी का त्योहार दिवाली केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा उत्सव है जिसकी गूँज पड़ोसी देशों में भी सुनाई देती है. हालाँकि, इन देशों में इसे मनाने का तरीका और नाम थोड़े अलग हैं, जो इस त्योहार की सांस्कृतिक समृद्धि को और भी बढ़ा देते हैं.

भारत में जहाँ इसे दीपावली के नाम से जाना जाता है और भव्य रूप से मनाया जाता है, वहीं विभिन्न भारतीय समुदायों के बीच भी इसके अलग-अलग मायने हैं:

सिखों के लिए बंदी छोड़ दिवस: सिख समुदाय इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है, जो छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद जी की मुगल कैद से रिहाई का प्रतीक है.

बंगाल और ओडिशा में काली पूजा: पश्चिम बंगाल और ओडिशा में, दिवाली की रात को काली पूजा (श्यामा पूजा) के रूप में मनाया जाता है, जो देवी काली को समर्पित है.

जैन नव वर्ष: जैन अनुयायी दिवाली के अगले दिन को अपने नए साल की शुरुआत के रूप में मनाते हैं.

भारत के उन पड़ोसी और एशियाई देशों की जो इस प्रकाश पर्व को अलग नामों और अनूठी परंपराओं के साथ मनाते हैं:

 

नेपाल (तिहार)यह पाँच दिवसीय त्योहार है जिसमें देवताओं के अलावा कौवे, गाय और कुत्तों जैसे चार जीवों की भी पूजा की जाती है, जो मृत्यु के देवता यम से जुड़े हैं.यह दशईं के बाद नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है.

मलेशिया (हरि दिवाली) अश्विन महीने में मनाया जाता है. लोग तेल से स्नान करते हैं, मंदिरों में प्रार्थना करते हैं, और मिलन समारोहों के साथ मिठाइयों और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं.

थाईलैंड (लाम क्रियोंग)  यह थाई कैलेंडर के 12वें महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इसमें केले के पत्तों और अगरबत्ती से बने दीपक (क्रियोंग) जलाकर पानी में छोड़े जाते हैं, आतिशबाजी और मिठाइयों का आदान-प्रदान भी होता है.

यह दर्शाता है कि दिवाली का सार, बुराई पर अच्छाई की जीत और रोशनी का प्रसार हैं. एक साझा सांस्कृतिक धागा है जो इन सभी देशों को जोड़ता है, भले ही उनके स्थानीय नाम और पूजा विधि अलग क्यों न हो.

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