26 लाख दीयों के साथ, आधुनिक अयोध्या में त्रेता युग के रामराज्य की वापसी का उत्सव

Ayodhya ki Diwali: हिंदू धर्म में, दिवाली केवल एक दिन का त्योहार नहीं है, बल्कि यह धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलने वाला पाँच दिनों का महापर्व है. यह पर्व अपने बहुआयामी स्वरूप को दर्शाता है, जिसमें कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पौराणिक घटनाएँ समाहित हैं. इन सभी कथाओं में, भगवान राम की अयोध्या वापसी की कथा सबसे अधिक व्यापक और भावनात्मक रूप से प्रचलित है.

त्रेता युग की प्रथम दीपोत्सव

त्रेता युग में, भगवान राम ने लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करके धर्म की स्थापना की थी. इस महान विजय के बाद, वह अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ, चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके, कार्तिक मास की अमावस्या के दिन अपनी प्रिय नगरी अयोध्या वापस लौटे थे. श्रीराम के आगमन की खबर अयोध्यावासियों के लिए अंधकार में प्रकाश के समान थी. उनका प्रिय राजा वनवास से लौट रहे थे, यह उनके लिए सबसे बड़ा उत्सव था. इस अपार खुशी में, अयोध्या के लोगों ने अपनी नगरी को एक दुल्हन की तरह सजा दिया.

दीपों का अद्भुत प्रकाश

अयोध्यावासियों ने श्रीराम के स्वागत में घी के असंख्य दीपक जलाए. कार्तिक अमावस्या की वह काली रात इन दीपों के प्रकाश से जगमगा उठी, जिससे संपूर्ण नगरी आलोकित हो गई. यह उत्सव अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक बन गया.

उत्साह और सजावट

शहर के घर-घर का रंग-रोगन किया गया था. नगर की गलियों को सुगंधित द्रव्यों से सींचा गया और उन्हें सुंदर चौकों (रंगोली) से सजाया गया. लोगों ने अपने घरों के दरवाज़ों पर सोने के कलश, बंदनवार, ध्वजा और पताकाएँ लगाईं.

जन-जन का उल्लास

पुरुषों, बच्चों और महिलाओं ने नए वस्त्र धारण किए. पूरे नगर में मिठाइयाँ बाँटी गईं, और चारों ओर हर्षपूर्वक डंके बज रहे थे. कहा जाता है कि श्रीराम की वापसी पर सूखी हुई सरयू नदी भी फिर से अविरल बहने लगी थी और देवी-देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की थी.

आधुनिक अयोध्या का दीपोत्सव

राम की नगरी अयोध्या आज भी उसी भावना से दीपोत्सव मनाती है, लेकिन यह उत्सव अब एक विश्वस्तरीय रूप ले चुका है. अयोध्या का दीपोत्सव, जो कई वर्षों से मनाया जा रहा है, हर साल अपने ही रिकॉर्ड तोड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करता है.इस वर्ष, भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर भव्य, दिव्य और अलौकिक दीपोत्सव के लिए तैयार है.

विराट दीपोत्सव और विश्व रिकॉर्ड

इस वर्ष अयोध्या में 26 लाख से अधिक दीये जलाए जाने की तैयारी है, विशेषकर सरयू घाट और राम की पैड़ी पर. यह संख्या पिछले सभी रिकॉर्डों को तोड़कर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाएगी. लाखों दीयों की यह श्रृंखला पूरे शहर को त्रेता युग की झलक देगी.

दिव्य आयोजन

दीपोत्सव का कार्यक्रम तीन दिवसीय होगा. इसमें मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन, लेज़र शो और ध्वनि-प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से रामायण के दृश्यों का प्रदर्शन किया जाएगा. सरयू नदी के तट पर भव्य आरती होगी, जिसमें 2100 वेदाचार्य सामूहिक महाआरती में हिस्सा लेंगे.

सांस्कृतिक कार्यक्रम

इस उत्सव में भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक झाँकियाँ और रामलीला का मंचन भी शामिल होगा. रामकथा पार्क में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम और विजेताओं का सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा. इस बार, प्रदूषण-मुक्त हरा आतिशबाजी शो भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगा

अयोध्या का दीपोत्सव केवल दीप जलाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, संस्कृति और भक्ति का एक अद्वितीय संगम है, जो हर साल श्रीराम की वापसी के गौरवशाली क्षणों को जीवंत कर देता है.

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