तेजस्वी को CM फेस बना फंस गई महागठबंधन ! कांग्रेस की चुप्पी पर भी उठ रहे सावल

Bihar assembly election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान की तारीख करीब आते ही महागठबंधन एक बड़ा और निर्णायक राजनीति दांव चला है. 23 अक्टूबर को तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा और मुकेश साहनी को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करके महागठबंधन ने न केवल अपनी अंदरूनी कलह पर विराम लगाया है, बल्कि सीधे तौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है. यह घोषणा महज ऐलान नहीं बल्कि महागठबंधन की सोची समझी रणनीति है, जिसके पीछे लालू यादव की शर्त, साहनी का हठ और। मल्लाह वोट बैंक को साधने की महत्वपूर्ण कवायद है.

महागठबंधन की शेष नेताओं ने जिस नाटकीय ढंग से यह फैसला लिया है, वह पर्दे पीछे की जबरदस्त राजनीतिक उठक-पटक को दर्शाता है. जब 22 अक्टूबर को कांग्रेस परिवेश अशोक गहलोत और प्रदेश प्रभारी कृष्ण अल्लावरु ने पहले तेजस्वी और फिर राबड़ी आवास पर लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की, सूत्रों के मुताबिक लालू ने स्पष्ट कर दिया था कि गठबंधन को एक मजबूत संदेश देने और नेतृत्व की अनिश्चितता को खत्म करने के लिए तेजस्वी को ही सीएम फेस घोषित करना अनिवार्य होगा.

दूसरी और प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले VIP सुप्रीमो मुकेश साहनी ने उपमुख्यमंत्री पद की घोषणा की मांग करते हुए. उसमें शामिल होने से इनकार कर दिया. उनका तर्क था की 25 से कम सीटों पर राजी होने के पीछे डिप्टी सीएम पद का आश्वासन था. इस है के बाद अशोक गहलोत को दिल्ली से संपर्क करना पड़ा और हरी झंडी मिलते इस मुकेश साहनी के नाम की घोषणा कर दी गई.

यह घोषणा महागठबंधन का आखिरी दांव है, जिसका सीधा निशाना एनडीए पर है अब महागठबंधन खुलेआम यह दवाब बन सकेगा, कि जब उन्होंने अपना सीएम फेस घोषित कर दिया है तो एनडीए क्यों नहीं नीतीश कुमार को सीएम फेस घोषित कर रही है.

वही अमित शाह के यह बयान, चुनाव बाद विधायक दल तय करेंगे कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. एनडीए की अनिश्चितता को दर्शाता है, महागठबंधन अभी इसी बात को हथियार बनाकर प्रचार करेंगी. विश्लेषकों का मानना है कि इस घोषणा से तेजस्वी से ज्यादा रहता नीतीश कुमार को मिल सकती है, क्योंकि एनडीए पर सीएम फेस के ऐलान का दबाव बढ़ेगा और उन्हें अनिश्चितता से बाहर निकलना पड़ेगा.

मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस बनाकर महागठबंधन ने लगभग 30-35 विधानसभा सीटों पर निर्णायक प्रभाव रखने वाले मल्लाह/केवट समाज (आबादी2.6%) को एक सीधा संदेश दिया है.महागठबंधन उनके नेता का न केवल सम्मान करता है, बल्कि उन्हें सर्वोच्च पद पर स्थापित कर रहा है, जबकि NDA ने मल्लाह समाज को केवल राज्यमंत्री और बिहार में मंत्री पद ही दिया है.भले ही VIP केवल 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन सहनी को आगे करके पूरे समाज को महागठबंधन के साथ मजबूती से जोड़ा गया है.

यह घोषणा एक आवश्यक कदम था जिसने महागठबंधन को चुनावी दौड़ में एक स्पष्ट नेतृत्व और एजेंडा दिया है. यह रणनीति एनडीए को रक्षात्मक स्थिति में धकेलती है, मल्लाह समाज को साधती है और गठबंधन की एकता को मजबूत करती है. आप सब की निगाहें एनडीए पर टिकी है कि क्या इस दबाव में नीतीश कुमार को सीएम फेस के लिए घोषित करेगी या फिर अमित शाह के बयान पर अड़ी रहेगी.

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