बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव का परिवार एक बार फिर भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है. शनिवार को लालू की छोटी बेटी और कभी अपने पिता को किडनी दान कर सुर्खियों में आईं रोहिणी आचार्य ने अचानक राजनीति छोड़ने और परिवार से सभी संबंध तोड़ने का ऐलान कर दिया. रोहिणी के इस कदम ने न सिर्फ पार्टी पदाधिकारियों को चौंकाया बल्कि यह लालू परिवार में वर्षों से चली आ रही अंदरूनी तकरार की एक और बड़ी कड़ी बन गई है. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब सत्ता, उत्तराधिकार और राजनीतिक वर्चस्व के मुद्दे पर आरजेडी के इस सबसे प्रभावशाली परिवार में मतभेद खुलकर सामने आए हों. पिछले एक दशक में लालू परिवार कई बार सार्वजनिक कलह, आरोप-प्रत्यारोप और विवादों का केंद्र बन चुका है.
कैसे हुई विरासत की जंग की शुरुआत ?
चारा घोटाले में दोषी सिद्ध होने के बाद 2017 में जब लालू प्रसाद यादव जेल गए, तब पार्टी और परिवार की बागडोर उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव के हाथों में आ गई. राजनीतिक अनुभव और लोकप्रियता के आधार पर वरियता मिलने से बड़े बेटे तेज प्रताप यादव असंतुष्ट हो गए. यहीं से दोनों भाइयों के बीच नेतृत्व की लड़ाई की शुरुआत हुई, जो समय के साथ और तीखी होती चली गई. तेज प्रताप कई मौकों पर खुद को लालू का असली राजनीतिक वारिस बता चुके हैं. यह संघर्ष परिवार के भीतर पहली प्रमुख दरार माना गया.
तेज प्रताप का राजनीतिक विरोध
वर्ष 2018 में तेज प्रताप यादव ने शादी के पाँच महीने बाद ही अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक की अर्जी देकर सबको चौंका दिया. उन्होंने परिवार पर उपेक्षा के आरोप लगाए और कहा कि उनकी बात कोई नहीं सुनता. 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तेज प्रताप ने पार्टी से नाराज़ होकर लालू-राबड़ी मोर्चा बनाने की घोषणा की और अपनी पसंद के उम्मीदवार को टिकट न मिलने पर जहानाबाद सीट से निर्दलीय उम्मीदवार चंद्र प्रकाश का समर्थन कर दिया. इसके कारण RJD का आधिकारिक उम्मीदवार महज 1,751 वोटों से चुनाव हार गया. इसी दौरान ऐश्वर्या राय ने अपनी सास राबड़ी देवी और ननद मीसा भारती पर गंभीर आरोप लगाए, जिनमें प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और खाना न देने तक के आरोप शामिल थे. यह विवाद राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा और परिवार की कलह पूरी तरह सार्वजनिक हो गई.
तेज प्रताप बनाम जगदानंद सिंह विवाद
2021 में तेज प्रताप यादव ने RJD के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से खुली भिड़ंत कर दी. मामला छात्र RJD के प्रदेश अध्यक्ष और तेज प्रताप के करीबी आकाश यादव के निलंबन का था. तेज प्रताप ने इसे पार्टी संविधान के खिलाफ बताते हुए जगदानंद पर निशाना साधा, जबकि तेजस्वी यादव ने जगदानंद सिंह का स्पष्ट समर्थन किया. इससे दोनों भाइयों के बीच दूरी और बढ़ गई.
सत्ता का वारिस कौन ?
साल 2022 के बाद तेज प्रताप लगातार दावा करते रहे कि पार्टी में उन्हें sidelined किया जा रहा है. उन्होंने बार-बार तेजस्वी यादव के अहम सलाहकार संजय यादव पर साज़िश का आरोप लगाया और उन्हें जयचंद कहा. मई 2025 में तब बड़ा विवाद खड़ा हुआ जब तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर एक महिला (अनुष्का यादव) के साथ 12 वर्ष के रिश्ते का दावा किया. लालू यादव ने इसे ग़ैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए तेज प्रताप को छह साल के लिए RJD और परिवार दोनों से निष्कासित कर दिया. तेज प्रताप ने फिर से आरोप लगाया कि यह कार्रवाई तेजस्वी के सबसे करीबी सलाहकार संजय यादव के इशारे पर हुई.
रोहिणी आचार्य की बगावत ?
सितंबर 2025 में पारिवारिक तनाव का नया दौर तब शुरू हुआ जब रोहिणी आचार्य ने अचानक अपने पिता लालू यादव, भाइयों तेजस्वी-तेज प्रताप और बहन मीसा भारती सभी को सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया. उन्होंने भी संजय यादव को जयचंद बताते हुए कई तीखे संकेत दिए. बिहार चुनाव 2025 में RJD की हार के बाद यह विवाद चरम पर पहुंच गया. नवंबर 2025 की सुबह रोहिणी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि तेजस्वी के सलाहकार संजय यादव और RJD नेता रमीज नेमत उन्हें परिवार और पार्टी से बाहर कराने में लगे हुए थे. उनकी राय को लगातार दबाया गया और हार की जवाबदेही लेने की बजाय सलाहकार परिवार में फूट डाल रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और परिवार से नाता तोड़ रही हैं.
लालू परिवार में सबसे बड़ा संकट?
विशेषज्ञ मानते हैं कि रोहिणी आचार्य का यह कदम परिवार की एकता पर सबसे बड़ा झटका है, क्योंकि रोहिणी को अब तक लालू प्रसाद की सबसे वफादार संतान माना जाता था. तेजस्वी–तेज प्रताप के बीच वर्षों से चली आ रही लड़ाई और अब रोहिणी का परिवार त्याग ये संकेत देते हैं कि आने वाले समय में RJD अपने सबसे बड़े संकट की ओर बढ़ रही है. चुनावी हार, नेतृत्व पर सवाल और सलाहकारों को लेकर विवाद इन सबके बीच RJD और लालू परिवार का भविष्य फिलहाल अनिश्चितता से घिरा हुआ है.