बिहार में लगातार बारिश से बिगड़े हालात… नदियां उफान पर, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात

Bihar Flood : बिहार में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. प्रदेश के कई जिलों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. वहीं, आकाशीय बिजली गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई. सहरसा में आंधी के दौरान पेड़ गिरने से वार्ड पार्षद सदस्य की भी जान चली गई. नेपाल में हो रही तेज बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. सुपौल में कोसी और मधुबनी में कमला नदी उफान पर हैं. दोनों जिलों के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं. कोसी नदी का पानी लगभग 700 घरों में घुस गया है. बाढ़ के खतरे को देखते हुए कोसी बराज के 56 गेट खोल दिए गए हैं.

शहरों में जलजमाव की स्थिति

इधर, रक्सौल में सरिसवा नदी का पानी घरों में घुस गया है, जिससे इलाके में बाढ़ की स्थिति बन गई है. किशनगंज में मेची नदी और कैमूर में कर्मनाशा नदी उफान पर हैं, जिसके कारण दोनों जिलों के कई गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. बेतिया में हालात गंभीर बने हुए हैं. 24 घंटे बाद भी शहर की सड़कों पर 3 फीट तक पानी जमा है. हाईवे से लेकर जिला मजिस्ट्रेट (DM) दफ्तर तक जलमग्न हैं. छपरा में कई घरों के बेसमेंट में 4 फीट तक पानी भर गया है, जिससे कार और बाइक डूब गई हैं. सीतामढ़ी, समस्तीपुर, गोपालगंज और सुपौल में भी यही हालात बने हुए हैं. शहरों में जहां जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ की वापसी ने हालात को गंभीर बना दिया है. लगातार बारिश के कारण राज्य की नदियों के जलस्तर में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटे तक कई जिलों में बारिश जारी रहने की संभावना है. दरभंगा और मधुबनी जिले समेत उत्तर बिहार के कई हिस्सों में कमला, बलान, बागमती, अधवारा समूह की नदियों के साथ-साथ खिरोई और कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. नेपाल में हो रही लगातार बारिश ने इन नदियों के प्रवाह को और अधिक खतरनाक बना दिया है.

भीषण बारिश से मधुबनी में बाढ़ का खतरा

झंझारपुर (मधुबनी) में बहने वाली कमला बलान नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है. स्थानीय प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें सतर्क हैं. विभाग के मुताबिक, नदी के तटबंध अभी तक सुरक्षित हैं, लेकिन जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. रिपोर्ट के अनुसार शनिवार सुबह झंझारपुर में नदी का जलस्तर 49.40 मीटर दर्ज किया गया था, लेकिन दिनभर की भारी बारिश के कारण यह बढ़कर 50 मीटर से अधिक हो गया. जलस्तर में तेजी से वृद्धि के कारण तटवर्ती इलाकों के निचले क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घरों और खेतों में घुसने लगा है.कमला पुल के सभी सातों फाटक खोल दिए गए हैं, ताकि जल प्रवाह बाधित न हो और नदी पर दबाव कम हो सके. महज कुछ घंटों में हुई यह वृद्धि संकेत है कि हालात और बिगड़ सकते हैं. वहीं नेपाल में भारी बारिश के चलते कोसी के जल स्तर में काफी बढ़ोतरी देखने को मिला है.हालात ये हैं कि 5 अक्टूबर 2025 सुबह 11 बजे तक कोसी बैराज से 5,10,960 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है.

खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा नदियों का जलस्तर

बिगड़ते हालात की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें. तटबंध के निचले इलाकों में रह रहे लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है. बाढ़ नियंत्रण विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से स्थिति पर निगरानी बढ़ा दी है. तटबंधों की सुरक्षा के लिए विशेष कार्य बल तैनात किया गया है और संभावित आपदा से निपटने के लिए बचाव दलों को तैयार रखा गया है. स्थानीय प्रशासन ने गांव-गांव में चौकसी बढ़ा दी है और कंट्रोल रूम के माध्यम से नदियों के बहाव और जलस्तर की हर घंटे की रिपोर्ट ली जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नेपाल में बारिश का सिलसिला नहीं थमा तो आने वाले दिनों में उत्तर बिहार के कई इलाकों में हालात और गंभीर हो सकते हैं. बारिश, जलजमाव और बाढ़ की संभावना के बीच इस इलाके के लोग प्रशासन की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं. जिनके लिए अगले 24-48 घंटे इस क्षेत्र के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं.

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