Seat sharing in NDA: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए गठबंधन में सीटों के बंटवारे पर आखिरकार सहमति बन गई. इस सहमति के पीछे की सबसे बड़ी वजह लोग जनशक्ति पार्टी रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान की मजबूत सौदेबाजी और राजनीतिक दूरदर्शित है. चिराग पासवान ने एनडीए के सभी घटक दलों को अपनी शर्तो पर सहमत होने के लिए मजबूर कर दिया. जिससे उनकी राजनीतिक परिपक्वता और हार्ड बारगेनिंग की क्षमता का पूरे देश ने लोहा माना है.
सीटों का बंटवारा, जदयू को सबसे ज्यादा, बीजेपी पीछे
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एनडीए में सीट का बंटवारा इस प्रकार तय हुआ है, जदयू 101 सीट भाजपा 100 सीट, लोजपा(र) 29 सीट, हम 8सीट, आरएलएसपी 6सीट.
यह बटवारा चिराग पासवान की मांगों और उनकी रणनीति की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया है विशेष बात यह है, कि जदयू को सबसे अधिक सिम मिली है जो गठबंधन की राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है.
जदयू का बड़ा त्याग
2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन चिराग पासवान की रणनीति के कारण उन्हें 72 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था. इस बार भी चिराग ने जो रुख अपनाया, उससे बीजेपी से कहीं अधिक जदयू डरी हुई थी. इसी भय के चलते जदयू ने 14 सीटों का त्याग कर बड़ा दिल दिखाया है, और 101 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमति जताई है.
बिहार फर्स्ट एजेंडा होगा चुनावी मुद्दा
चिराग पासवान का ‘बिहार फर्स्ट’और ‘बिहारी फर्स्ट’ एजेंडा एनडीए का मुख्य चुनावी मुद्दा बनेगा जदयू और बीजेपी दोनों इस एजेंडा को चुनाव में आगे रखने पर सहमति जताई है यह चिराग की राजनीतिक दृष्टि और बिहार के मुद्दों को लेकर उनकी समझ को दर्शाता है. बिहार में चिराग पासवान को एक ऐसा युवा नेता के रूप में देखा जाता है, जिनसे सभी दलों और नेताओं से मधुर संबंध है खास बात यह है, कि कांग्रेस और जन सुराज पार्टी भी चिराग को बिहार का एक सशक्त युवा चेहरा मानती है.
मांझी और कुशवाहा की मजबूरी
जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा दोनों नेता सीट बंटवारे से नाराज है, लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है. जीतन राम मांझी ने 15 सीटों की मांग की थी जबकि उपेंद्र कुशवाहा ने 10 सीटों की मांग रखी थी, लेकिन उन्हें 8 और 6 सीटों पर संतोष करना पड़ा है. जीतन राम मांझी केंद्र में कैबिनेट मंत्री हैं उनके बेटे संतोष सुमन बिहार कैबिनेट में मंत्री हैं, समधन और पुत्र वधू विधायक है. इसके बावजूद उनके मन में असंतोष है. वही उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का एक भी संसद या विधायक नहीं है और उन्हें फिर से राज्यसभा जाना है इसीलिए उनके पास बीजेपी की बात मानने के अलावा कोई रास्ता नहीं है.
आज हो सकता है आधिकारिक ऐलान
एनडीए गठबंधन में चल रही धमकी और मान मनौव्वल का खेल आज खत्म हो जाएगा, चिराग पासवान कि राजनीतिक जीत ने साबित कर दिया कि बिहार की राजनीति में अब युवा नेतृत्व की मजबूत भूमिका और गठबंधन की राजनीति में छोटे दल भी अपनी शर्तों पर बड़े फैसले करवा सकते हैं.