NDA के गढ़ में कांग्रेस की हुंकार, मोतिहारी में प्रियंका गांधी की रैली के मायने क्या

Priyanka Gandhi Bihar Rally: बिहार की राजनीति में शुक्रवार का दिन कांग्रेस के लिए महज एक चुनावी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संदेश का दिन साबित हो सकता है. दरअसल कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी बिहार दौरे पर हैं. पहले राहुल गांधी की 16 दिनों की बिहार यात्रा और अब प्रियंका गांधी का यह दौरा कांग्रेस की उस नई रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह न सिर्फ एनडीए बल्कि महागठबंधन के सहयोगी दलों, खासकर आरजेडी को भी चुनौती देती दिख रही है. जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस ने लंबे समय तक बिहार की राजनीति में एक सहयोगी की भूमिका में रही है. लेकिन अब पार्टी ‘फ्रंट फुट’ पर खेलती नजर आ रही है. खासकर बीते कुछ समय से…

 

प्रियंका गांधी की मोतिहारी में रैली को लेकर जानकारों का मानना है कि बिहार की सियासत दशकों से जातीय समीकरणों और पुरुष नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है. लेकिन बीते एक दशक से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में बदलाव देखने को मिला है…ऐसे में महिलाओं को केंद्र में रखकर प्रियंका का यह अभियान कांग्रेस की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है. अपने बिहार दौरे की शुरुआत प्रियंका गांधी पटना के सदाकत आश्रम में 2000 महिलाओं से संवाद के साथ शुरु करेंगी. जिसके बाद वो मोतिहारी में हर घर अधिकार रैली में 20 हजार से अधिक महिलाओं की उपस्थिति वाले जनसभा को संबोधित करेंगी. प्रियंका का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिहार में उनका पहला बड़ा स्वतंत्र राजनीतिक कार्यक्रम है. इससे पहले वह केवल राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में शामिल होने आई थीं.

 

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो कांग्रेस यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह अब सिर्फ गठबंधन की छाया में नहीं रहना चाहती. अब गठबंधन की छाया से दूर होने के लिए पार्टी को उस धुप में भी निकालना होगा जहां एनडीए का प्रभाव है और इसी रणनीति के तहत  एनडीए के प्रभाव वाले इलाकों में जाकर महिला मतदाताओं के मुद्दे पर जोर देना इस बात की ओर इशारा करता है कि कांग्रेस अपने पुराने जनाधार को वापस पाने की कोशिश में है. जिसका  एक संकेत को को आरजेडी चुनौती देना भी है…दरअसल बिहार की राजनीति में महिलाएं हमेशा से निर्णायक रही हैं. चाहे वह शराबबंदी का समर्थन हो या पंचायत चुनावों में उनकी सक्रियता, उन्होंने बार-बार बदलाव की दिशा तय की है. ऐसे में महिला मतदाताओं को सीधा संदेश देना कांग्रेस की एक सधी हुई रणनीति है.

 

प्रियंका गांधी की हुंकार बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकती है. पर असली चुनौती भी यहीं है सभा की भीड़ और नारों को मतों में बदलना. कांग्रेस को यह साबित करना होगा कि यह दौरा महज चुनावी स्टंट नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक अभियान की शुरुआत है. अगर प्रियंका इस भरोसे को जगा पाती हैं कि कांग्रेस महिलाओं, गरीबों और युवाओं की आवाज उठाने में सक्षम है, तो यह बिहार की राजनीति में पार्टी के लिए नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है

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