टुट सकता है महागठबंधन वाम दलों ने दे दिया संकेत, मुकेश सहनी और कांग्रेस एक इंच पीछे हटने को तैयार नहीं।

टुट जायेगा महागठबंधन सीटों के बंटवारे को लेकर जो रस्साकसी चल रहा है वह सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है। तेजस्वी नहीं संभाल पा रहे हैं अपने सहयोगी दलों को। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि वामदलों ने अलग से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कह दिया है कि गठबंधन के अन्दर जो चल रहा है उससे हम संतुष्ट नहीं हैं।

सीपीआई ने जहां 24 तो सीपीएम 11 सीटों की मांग कर दी है। ये मांग वैसे नहीं बजाप्ता प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से की गई है। वहीं माले जो 40 सीटों के लिए अड़ी हुई है ने कहा है कि सीटों का बंटवारा जल्द नहीं हुआ तो हम वाम दलों के सामने संकट खड़ा हो जायेगा।

वामदलों ने कहा है कि हम चंदा मांग कर चुनाव लड़ते हैं हमारे साथ कोई धनामल सेठ नहीं है, जो हमें चुनाव लड़ने के लिए पैसा देगा। इसलिए समय रहते सीटों का बंटवारा फाइनल हो जाना चाहिए। वाम दलों ने सार्वजनिक रूप से तेजस्वी पर दबाव बढ़ा दिया है। मुकेश सहनी अभी भी अलग राग अलाप रहे हैं। वे अपनी पार्टी के लिए 60 सीट और उप मुख्यमंत्री पद चाहते हैं। वे कुछ सीट कम कर सकते हैं लेकिन उप मुख्यमंत्री पद के लिए अड़े हुए हैं।

कांग्रेस कभी नरम तो कभी गरम रुख दिखाती आ रही है। अब कांग्रेस भी कहने लगी है कि 70 सीटों से कम पर लड़ने का तो सवाल ही नहीं है। इसमें भी शर्त ये कि कांग्रेस अपनी पसंद की सीट चाहती है न कि राजद की पसंद की।

इसमें राजद और माले दोनों को कुछ सीटिंग विधायकों का टिकट काटना होगा। कांग्रेस का यह भी मानना है कि अगर राजद इसके लिए तैयार नहीं है तो हम अकेले भी चुनाव में जा सकते हैं। कांग्रेस पार्टी सभी 243 सीटों की सूची तैयार कर ली है। मतलब साफ है कि कांग्रेस इस बार एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इधर मुकेश सहनी सार्वजनिक रूप से यह भी कह दिया है कि वीआईपी अपने प्रत्याशियों की चयन स्वयं करेगा इसमें किसी का हस्तक्षेप नहीं होगा। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा है कि तेजस्वी इस बार चाहते हैं कि टिकट की खरीद बिक्री ना हो और सभी दल जीतने वाले प्रत्याशी को मैदान में उतारे।

राजद भी इस बार टिकट नहीं बेचेगी इसका गारंटी उन्होंने पहले हीं दे दिया है। महागठबंधन में बात बनते बनते बिगड़ जा रही है। आज से ठीक दो दिन बाद बिहार विधानसभा चुनाव का ऐलान चुनाव आयोग कर सकता है। लेकिन महागठबंधन के सभी दल अपनी डफ़ली अपना राग अलाप रहे हैं। अब संभावना बनती जा रही है कि महागठबंधन टुट सकता है और सभी दल अलग-अलग चुनाव में जा सकता है। हालांकि राहुल गांधी की प्रतिक्षा हो रही है उनके विदेश से लौटने के बाद सीटों पर कुछ बात बन जाए नहीं तो महागठबंधन में सीटों को लेकर मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया है। राजद जो चाहता है उसे कोई दल स्वीकारने को तैयार नहीं है फिर तो महागठबंधन का भगवान हीं मालिक हैं।

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