Bihar Assembly Election 2025: आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सरगर्मियां तेज हो गई है. इन सब के बीच एक सवाल है जो हर किसी के मन में है कि अबकी बार किसकी सरकार. हालांकि इस सवाल के जवाब में तो वक्त है लेकिन जो रिपोर्ट सामने आ रही है. इसमें एक संकेत मिल रहा है. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की राजनीति में नेताओं की लोकप्रियता को लेकर जारी सियासी हलचल तेज हो गई है. इस बीच रिसर्च एजेंसी सी-वोटर के ताजा सर्वे ने राजनीतिक समीकरणों को नया आयाम दिया है. सितंबर 2025 में कराए गए इस सर्वे के मुताबिक, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव लगातार मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे पसंदीदा चेहरे बने हुए हैं. वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) की रेटिंग में भी इजाफा हुआ है. इसके उलट, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के ग्राफ में गिरावट दर्ज की गई है.
तेजस्वी यादव की बढ़त बरकरार
सी-वोटर फरवरी 2025 से बिहार में पसंदीदा मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर यह सर्वे कर रहा है. शुरुआत से ही तेजस्वी यादव इसमें शीर्ष पर बने हुए हैं. फरवरी में उनकी लोकप्रियता करीब 40% थी. इसके बाद महीनों तक इसमें गिरावट दर्ज की गई और अगस्त में यह 31.3% तक पहुंच गई. लेकिन सितंबर के ताजा सर्वे में तेजस्वी यादव की रेटिंग में फिर से उछाल आया और यह बढ़कर 35.5% हो गई. इस आंकड़े से यह साफ है कि तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद तेजस्वी यादव अब भी बिहार की राजनीति में सीएम पद के लिए मतदाताओं की पहली पसंद बने हुए हैं.
नीतीश कुमार की रेटिंग में हल्की बढ़त
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता में पिछले कुछ महीनों में गिरावट देखी गई थी. फरवरी में उनकी रेटिंग 18% थी, जो अगस्त में घटकर 14% तक पहुंच गई. सितंबर में हालांकि उनकी रेटिंग में हल्की बढ़त दर्ज हुई और यह 16% तक पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह मामूली उछाल उनकी हालिया राजनीतिक गतिविधियों और एनडीए में नेतृत्व को लेकर हो रहे चर्चाओं के कारण है.
पीके की लोकप्रियता में निरंतर इजाफा
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) बिहार की राजनीति में अपेक्षाकृत नए खिलाड़ी हैं, लेकिन सर्वे में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. फरवरी में उनकी रेटिंग 14.9% थी. जून में यह बढ़कर 18.2% तक पहुंच गई और इस दौरान उन्होंने सीएम नीतीश कुमार को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर कब्जा कर लिया. सितंबर में पीके की रेटिंग और चढ़कर 23.1% तक पहुंच गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पीके के लगातार गांव-गांव जाकर किए जा रहे जनसंपर्क अभियान और सिस्टम में बदलाव के वादों ने मतदाताओं पर असर डाला है.
चिराग पासवान का ग्राफ स्थिर लेकिन उतार-चढ़ाव के साथ
लोजपा-रामविलास के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सर्वे में इस बार 9.5% रेटिंग के साथ चौथे स्थान पर हैं. फरवरी में उनकी रेटिंग सिर्फ 3.7% थी. मई में यह बढ़कर 10.6% तक पहुंच गई थी. लेकिन इसके बाद से उनकी रेटिंग 9 से 10% के बीच बनी हुई है. चिराग की लोकप्रियता में इस ठहराव को राजनीतिक जानकार विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के साथ उनके बदलते रिश्तों का नतीजा मानते हैं.
सम्राट चौधरी की रेटिंग में गिरावट
बिहार के डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी के लिए यह सर्वे निराशाजनक रहा.अगस्त में उनकी लोकप्रियता 9.5% थी. सितंबर के नतीजों में यह घटाकर 6.8% पर आ गई. विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी को लेकर भाजपा की ओर से स्पष्ट नेतृत्व प्रोजेक्शन की कमी और हालिया राजनीतिक विवादों ने उनकी छवि को प्रभावित किया है.
बदल सकते हैं समीकरण
सी-वोटर का यह सर्वे बताता है कि बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री पद के लिए अभी भी तेजस्वी यादव की पकड़ मजबूत है. हालांकि, पीके की बढ़ती लोकप्रियता, नीतीश कुमार की वापसी की कोशिशें और अन्य नेताओं के उतार-चढ़ाव के चलते चुनावी समीकरण आने वाले महीनों में बदल सकते हैं. राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अक्टूबर और नवंबर में होने वाली सियासी गतिविधियां, उम्मीदवारों के ऐलान और गठबंधन की तस्वीर इस ग्राफ को और बदल सकती है. सर्वे के ताजा आंकड़े बताते हैं कि बिहार में तेजस्वी यादव फिलहाल सीएम पद के लिए सबसे आगे हैं. पीके मजबूती से दूसरे स्थान पर उभर रहे हैं, जबकि नीतीश कुमार की रेटिंग में मामूली सुधार हुआ है. दूसरी ओर, चिराग पासवान और सम्राट चौधरी की घटती लोकप्रियता उनके लिए चुनौतीपूर्ण संकेत हैं. चुनाव नजदीक आते-आते यह ग्राफ किस और झुकेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी.