Bihar assembly election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर NDA में सीटों को सहमति बन चुकी है लेकिन महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सीटों के बंटवारे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। तेजस्वी यादव, कांग्रेस और अन्य घटक दलों के बीच बातचीत जारी है, मगर सहमति दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, महागठबंधन के तमाम शीर्ष नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और लगातार बैठकें चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। सबसे बड़ा पेंच मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी को लेकर फंसा हुआ है। सहनी 50 सीटों की मांग पर अड़े हैं, जबकि राजद उन्हें केवल 12 सीट देने को तैयार है।
कांग्रेस भी 60 से अधिक सीटों की मांग कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि अगर वह अपनी सीटें घटा रही है, तो राजद को भी उसी अनुपात में सीटें छोड़नी चाहिए, ताकि संतुलन बना रहे। लेकिन राजद का तर्क है कि राज्य में वास्तविक जनाधार उसी का है, ऐसे में उसे कम सीटों पर लड़ना स्वीकार नहीं।
उधर, राहुल गांधी ने महागठबंधन के सभी घटक दलों को दिल्ली बुलाया है। दिल्ली में जारी बैठक को निर्णायक माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर आज कोई सहमति नहीं बनी, तो महागठबंधन टूट सकता है।
इधर, मुकेश सहनी को लेकर भाजपा ने नई चाल चल दी है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने सहनी को आठ विधानसभा सीटें और एक विधान परिषद सीट देने की पेशकश की है। साथ ही, अगर एनडीए की सरकार बनती है तो मंत्री पद का आश्वासन भी दिया गया है।
कांग्रेस खेमे में भी मतभेद गहराते जा रहे हैं। कुछ वरिष्ठ नेता, जो खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते, शुरू से ही अकेले चुनाव लड़ने की वकालत करते रहे हैं। वहीं, कांग्रेस और माले के कई विधायक गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ने के जोखिम से बचना चाहते हैं।
राजद को कांग्रेस से इस बात की नाराजगी है कि कांग्रेस तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने के पक्ष में नहीं है। लालू प्रसाद यादव इन दिनों परिवार के साथ दिल्ली में कोर्ट पेशी के सिलसिले में मौजूद हैं, जबकि कांग्रेस लगातार कोशिश में है कि गठबंधन टूटने से बचा रहे।
हालांकि, तेजस्वी अपने सलाहकारों के दबाव में किसी भी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं हैं। कहा जा रहा है कि वीआईपी के कई टिकट चाहने वाले उम्मीदवारों से पहले ही डील हो चुकी है, इसलिए अब मुकेश सहनी पीछे हटने की स्थिति में नहीं हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आज का दिन महागठबंधन के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। अगर आज सहमति नहीं बनी, तो तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन टूटने के कगार पर पहुंच जाएगा और इसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है।