Chhath Mahaparv: छठ का चार दिवसीय महापर्व का तीसरा और सबसे पवित्र दिन है आज। कार्तिक शुक्ल षष्ठी के इस विशेष दिन देशभर में लाखों श्रद्धालु निर्जला व्रत रख रहे है। बिहार, झारखंड, पूर्वांचल और देश के अन्य हिस्सों मे भी नदी तालाब के घाटों पर आज शाम भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।
छठ महापर्व की चार दिवसीय आयोजन में तीसरा दिन सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है इस दिन व्रती नहाए खाए और खरना के बाद पूर्ण निर्जला उपवास रखती है। सुबह से लेकर शाम तक ना तो कुछ खाती हैं, और ना ही एक बूंद पानी पीती हैं। यह कठोर तपस्या व्रती की श्रद्धा और संकल्प शक्ति का परिचायक है। यह अर्घ्य केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सूर्य देव के प्रति अपार श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण का प्रतीक है। आज शाम 5:10 बजे से 5:58 बजे तक का समय अर्घ्य देने के लिए सर्वाधिक शुभ और मांगलिक माना गया है।
28 अक्टूबर 2025 को कार्तिक शुक्ल सप्तमी के दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दे कर व्रती अपना 36 घंटे का निर्जला उपवास तोड़ेगी। उषा अर्घ्य प्रातः 5:57 बजे से होगा(अनुमानित)।इसके बाद ही छठ व्रत पूर्ण होगा। व्रती सूर्य देव और छठी मइया को प्रणाम करके प्रसाद ग्रहण करेंगे और व्रत तोड़ेंगे। इसे पारण या पारना कहते हैं।