Trump new tariff warning : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और कनाडा से आने वाले कृषि उत्पादों पर नए टैरिफ लगाने के संकेत देने के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है। इसका सीधा असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सेंसेक्स 600 अंकों तक फिसल गया, जबकि चावल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
ट्रंप ने क्या कहा?
सोमवार को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी किसान विदेशी सस्ते आयात से परेशान हैं। उन्होंने खासतौर पर भारत, वियतनाम और थाईलैंड से आने वाले चावल पर ‘डंपिंग’ का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें डंपिंग नहीं करनी चाहिए… हम इसका ध्यान रखेंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका इसके लिए कौन-से कदम उठाने वाला है।
शेयर बाजार पर सीधा असर
टैरिफ की आशंका के बाद मंगलवार सुबह भारतीय बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। चावल कंपनियों के शेयरों में 6% तक गिरावट आई। KRBL के शेयर 6% टूटे। कंपनी ने हाल की अर्निंग कॉल में कहा था कि भारतीय चावल पर पहले ही अमेरिका में 50% ड्यूटी लगती है और दोनों देशों के बीच चल रही चर्चा से इसमें राहत की उम्मीद है। कंपनी का अमेरिकी बाजार में एक्सपोज़र सीमित होने के कारण उस पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
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LT Foods को सबसे ज्यादा झटका लगा, क्योंकि उसका अमेरिका पर बड़ा निर्भरता है। कंपनी की कुल आय का 46% हिस्सा नॉर्थ अमेरिका से आता है और इस वर्ष वहां 47% ग्रोथ भी दर्ज की गई। इसका फ्लैगशिप ब्रांड अमेरिकी बाजार में 61% मार्केट शेयर के साथ बासमती राइस कैटेगरी में नंबर वन है। Golden Star जैस्मीन राइस में भी शीर्ष स्थान पर है। टैरिफ बढ़ने की आशंका से कंपनी के शेयरों में 6% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल
ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब 10–11 दिसंबर को अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि (USTR) के डिप्टी एंबेसडर रिक स्विट्जर भारत दौरे पर आने वाले हैं। इस बैठक में भारतीय चावल पर मौजूदा 50% इम्पोर्ट ड्यूटी और संभावित नई व्यवस्था पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। ट्रंप ने कनाडा से आने वाले फर्टिलाइजर पर भी टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं। इससे अमेरिकी किसानों की चिंता और बढ़ सकती है, क्योंकि अमेरिका में पोटाश की सबसे बड़ी सप्लाई कनाडा से ही आती है। ट्रंप के बयानों ने न सिर्फ भारतीय चावल कंपनियों को झटका दिया है, बल्कि वैश्विक कृषि बाजार में भी नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। आने वाले हफ्तों में भारत-अमेरिका वार्ता का नतीजा तय करेगा कि इन कंपनियों पर दबाव कितना बढ़ेगा या राहत मिलेगी।