NDA और महागठबंधन में सीट बंटवारे पर कहां फंस रहा पेच, जानिए कब होगा सीटों का ऐलान

Bihar election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी महागठबंधन (MGB) के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है.दोनों ही गठबंधनों में घटक दल अपनी-अपनी पसंद की और जीतने लायक मानी जाने वाली सीटों पर अड़े हुए हैं. इससे सीट बंटवारे पर सहमति बनने में मुश्किल आ रही है.

NDA में चिराग और उपेंद्र की मांगों से बढ़ा तनाव

NDA में सबसे बड़ा पेच LJP(रामविलास) के चिराग पासवान और राष्ट्र लोक जनता मंच (RLM) के उपेंद्र कुशवाहा की मांगों को लेकर फंसा है. दोनों नेता ऐसी सीटों पर दावा कर रहे हैं, जहां उनकी पार्टी का जनाधार मजबूत नहीं, लेकिन जीत की संभावना ज्यादा है. ये सीटें मुख्य रूप से भाजपा और JDU की परंपरागत सीटें हैं, जिन्हें दोनों बड़ी पार्टियां छोड़ने को तैयार नहीं हैं. चिराग पासवान बार-बार दोहरा चुके हैं कि वे विधानसभा चुनाव में भी लोकसभा की तरह 100% स्ट्राइक रेट बनाए रखना चाहते हैं. इसी वजह से वे NDA के अंदर सीटों के चयन को लेकर सख्त रुख दिखा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट की माने तो गठबंधन में 83 सीटों पर बातचीत अटक गई है. इनमें नरकटियागंज, शिवहर, बेलसंड, लौकाहा, जोकीहाट, बहादुरगंज, ठाकुरगंज, कोचधामन, वायसी, मधेपुरा, कांटी, हथुआ, रघुनाथपुर, गरखा, सोनपुर, राघोपुर, उजियारपुर, बख्तियारपुर जैसी सीटें शामिल हैं.

भाजपा और JDU अपनी परंपरागत सीटें छोड़ने को तैयार नहीं

भाजपा 2020 के विधानसभा चुनाव में जीती हुई 74 सीटों के अलावा 10 ऐसी सीटों पर भी दावा बरकरार रखना चाहती है, जहां वह मामूली अंतर से हार गई थी. इनमें कल्याणपुर, किशनगंज, कुढ़नी, सीवान, बखरी, भागलपुर, बक्सर, डेहरी, औरंगाबाद और बोधगया जैसी सीटें शामिल हैं. इस तरह भाजपा कुल 84 सीटों पर किसी भी तरह का फेरबदल नहीं चाहती. दूसरी ओर, JDU भी अपनी 60 परंपरागत सीटों पर बदलाव के खिलाफ है. इनमें 2020 में जीती गई 43 सीटों के अलावा सिंहेश्वर, दरभंगा ग्रामीण, गायघाट, महाराजगंज, बड़हरिया, मढ़ौरा, राजा पाकर, मटिहानी, अलौली, खगड़िया, नाथनगर, घोरैया, जमालपुर, इस्लामपुर, करगहर जैसी सीटें शामिल हैं.

महागठबंधन में भी सीटों पर रस्साकशी

NDA की तरह महागठबंधन में भी सीट बंटवारे को लेकर तनाव कांग्रेस और RJD के बीच है. 2020 के चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ी थी, लेकिन सिर्फ 19 सीटें जीत पाई थी. पार्टी का मानना है कि हार की वजह कमजोर जनाधार वाली सीटों को थोपना था. इस बार कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसी सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी, जहां जीत की संभावना कमजोर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस पिछली बार हारी हुई 51 सीटों में से 37 सीटों पर दावेदारी करने से इनकार कर रही है. इनमें से 21 सीटें ऐसी हैं, जहां 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन का उम्मीदवार जीत नहीं पाया था. RJD, जो गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है, कांग्रेस की इस मांग पर नरमी दिखाने को तैयार नहीं है. मीडिया सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन में सीट बंटवारे का मसला 10 अक्टूबर तक सुलझ सकता है.

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