Bihar assembly election 2025: बिहार की राजनीति धरती पर इस बार विधानसभा चुनाव अपने आप में एक अनूठा अध्याय लिख रहा है. 243 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले इस मुकाबले में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कौन जीतेगा, बल्कि यह है कि जीतने के बाद मुख्यमंत्री कौन होगा? NDA और INDIA दोनों की गठबंधनों ने चुनाव से पहले अपना मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया है.
दो चरणों में फैसला
बिहार में चुनाव दो चरणों में संपन्न होने वाले पहले चरण 6 नवंबर को 121 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरी चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान होगा. 14 नवंबर को बिहार की राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन को 122 सीटों की जरूरत होगी.
महागठबंधन में जब अपने ही बन गए प्रतिद्वंद्वी
इंडिया गठबंधन की स्थिति देखकर लगता है जैसे यह अपने ही खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. RJD ने 143 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जिनमें 24 महिलाएं भी शामिल है. असली समस्या यह है कि कम से कम 8 सीटों पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. यह संख्या और भी बढ़ सकती है, राजद की उम्मीदवार कांग्रेस के साथ लालगंज वैशाली और कहलगांव में सीधे मुकाबले में है.
यह आंतरिक टकराव सिर्फ संख्याओं की बात नहीं है, यह गठबंधन के भीतर गहरे मतभेद नेतृत्व को लेकर असमंजस और सीट बंटवारे में अनुशासन की कमी को दर्शाता है. जब सहयोगी दल एक दूसरे से लड़ने से हैं तो वह वोट बंटते हैं, फायदा विपक्ष को मिलता है.
एनडीए का संतुलित सीट बंटवारा
एनडीए गठबंधन इस बस बंटवारे में एक नया फार्मूला अपनाया है. बीजेपी और जेडीयू दोनों को बराबर 101–101 सीटें दी गई है. यह पहली बार है जब दोनों दल समान संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ेगी. चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं, जो उनकी बढ़ती राजनीतिक साख को दर्शाता हैं. हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 6–6 सीटें दी गई है. एनडीए का यह सीट बंटवारा इंडिया गठबंधन के मुकाबले ज्यादा अनुशासित और संतुलित दिखता है. कम से काम कागजों पर एनडीए में आंतरिक टकराव की खबरें तो नहीं आई, यह गठबंधन प्रबंधन में एनडीए की मजबूती को दर्शाता है.
प्रशांत किशोर और आप का दांव
इस चुनाव में दो नए खिलाड़ियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सभी 243 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है, और जोखिम भरा कदम उठाया है. प्रशांत किशोर ने बिहार में जमीनी स्तर पर काफी काम किया है, और युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाई है. वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी भी बिहार में अपनी किस्मत आजमा रही है, हालांकि आप की बिहार में जमीन स्थिति मजबूत नहीं है, लेकिन वोट काटने की क्षमता जरूर रखती है. दोनों की उपस्थिति से चुनावी समीकरण और पेचीदा हो गया है.
संख्या में सुधार पर सवाल बरकरार
महिला उम्मीदवारों की संख्या में इस बार बढ़ोतरी हुई है, राजद ने सबसे ज्यादा 24 महिलाओं को टिकट दिया है. बीजेपी और जेडीयू ने 13–13 महिला उम्मीदवार खड़े किए हैं, जबकि लोजपा (रामविलास) में 6 महिलाओं को मौका दिया है. कांग्रेस ने अपेक्षाकृत कम सिर्फ 5 महिलाओं को टिकट दिया है. हालांकि यह भी सच है कि इनमें से अधिकांश महिला उम्मीदवार राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखती है. असली महिला सशक्तिकरण तब होगा जब जमीनी स्तर से उठकर आने वाली महिलाएं राजनीति में प्रवेश करेंगी.
बिहार की सनातन राजनीति
बिहार की राजनीति में जाति का समीकरण हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते आ रहा है. राजद ने अपनी पारंपरिक रणनीति के तहत यादव मुस्लिम समीकरण पर जोड़ दिया है. पार्टी ने 51 यादव उम्मीदवार उतारे हैं, जो इसकी सबसे बड़ी संख्या है. 19 मुस्लिम 14 सवर्ण और 11 कुशवाहा उम्मीदवार भी राजद की सूची में है. जेडीयू ने केवल 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जो उसकी सामाजिक इंजीनियरिंग के बदलते तेवर को दिखाता है. एनडीए ने फॉरवर्ड और ओबीसी जातियों पर विशेष फोकस किया है. जबकि इंडिया गठबंधन ने पिछड़ा और दलित वर्गो को साधने की कोशिश की है.
अनिश्चितता का दौर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अनिश्चितता आंतरिक खींच तान और नए प्रयोगों का चुनाव हैं…मुख्यमंत्री पद के चेहरे के प्रभाव ने इस चुनाव को और जटिल बना दिया है. 14 नवंबर को जब मतगणना होगी.. तब यह साफ होगा कि बिहार की जनता ने किस गठबंधन को अपना भरोसा दिया है, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह होगा कि जीतने वाले गठबंधन में मुख्यमंत्री का चेहरा कैसे तय होगा… क्या यह फैसला सीटों की संख्या से होगा या फिर चुनाव के बाद की राजनीतिक शह मात से?