Bihar Vidhansabha chunav: बिहार विधानसभा में कल लोकतंत्र की मर्यादाओं को शर्मसार करने वाला मंज़र देखने को मिला… विपक्ष ने एसआईआर पर चर्चा की मांग को लेकर ऐसा बवाल काटा कि सदन रणभूमि में तब्दील हो गया। कागज़ के गोले नीतीश कुमार की ओर फेंके गए, कुर्सियां हवा में लहराईं और मार्शल्स को इन्हें काबू करने में पसीने छूट गए। आज भी विधानसभा सही तरीके से नहीं चल पाई अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये आग इतनी भड़क क्यों गई? क्या वाकई मतदाता पुनरीक्षण (SIR) लोकतंत्र के लिए खतरा है, या विपक्ष सिर्फ सियासी ड्रामा कर रहा है?
SIR का मुद्दा विधानसभा बना अखाड़ा
यह कोई अखाड़ा नहीं… यह बिहार विधानसभा है… जहां विपक्षी विधायक गुस्से में इस कदर बेकाबू हो गए कि सदन की कुर्सियां तक हवा में लहराने लगीं। और वजह बना मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का… जिसे विपक्ष लोकतंत्र के खिलाफ बता रहा है। तेजस्वी यादव ने विधानसभी अध्यक्ष से कहा कि जब वोटर ही लिस्ट से गायब कर दिए जाएंगे तो हम किस लोकतंत्र की बात करेंगे? हम इस मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं… मगर सरकार भाग रही है।
तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद सदन का पारा और चढ़ गया। हंगामा इतना बढ़ा… कि विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को सदन की कार्यवाही 21 मिनट बाद ही स्थगित करनी पड़ी। नंद किशोर ने कार्यवाही को स्थगित करते हुए कहा कि आपकी मंशा जनता की बात रखने की नहीं… सिर्फ हंगामा करने की है।
नीतीश कुमार पर फेंके गए कागज़
हंगामे के बीच कागज़ के गोले नीतीश कुमार की ओर फेंके गए… विपक्षी सदस्य वेल तक पहुंचे… और फिर वो हुआ जो इससे पहले कभी नहीं देखा गया। सदन में कुर्सियां फेंक दी गईं। मार्शल्स को इन्हें रोकने के लिए ज़बरदस्त मशक्कत करनी पड़ी। जनता परेशान है… विपक्ष सड़कों पर है… और नीतीश सरकार के लिए यह सत्र अग्निपरीक्षा बन गया है।
हंगामे की भेंट चढ़ रहा मानसून सत्र
बिहार विधानसभा का मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है। एक ओर विपक्ष मतदाता सूची में धांधली का आरोप लगा रहा है… तो दूसरी ओर सरकार इसे बेबुनियाद बता रही है। अब सवाल ये है कि क्या लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत में इस तरह का बवाल सही है? या फिर ये चुनाव से पहले का सियासी ड्रामा है? जवाब तो वक्त देगा… लेकिन बिहार की सियासत में उठता यह तूफान आने वाले दिनों में और बड़ा हो सकता है।