बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चर्चा में आए चिराग…! क्या 2020 वाला खेल दोहराएंगी पार्टी

Bihar assembly election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में करीबन 1 महीने का ही समय बाकी है . इसी बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी ( रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान चर्चा में बने हुए हैं. हमेशा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चिराग के निशाने पर रहते हैं. शायद जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के लिए यह बड़ी चुनौती बन सकते हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर विधानसभा चुनाव लड़ा था . हालांकि उन्होंने केवल चार उम्मीदवार भाजपा के खिलाफ उतारे थे.

चिराग पासवान ने खुद को पीएम मोदी का हनुमान बताया….

2020 में चिराग पासवान ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान भी करार दिया था. उन्होंने कहा था कि जैसे हनुमान भगवान राम के प्रति समर्पित रहे, वैसे ही वे भी हर परिस्थिति में पीएम मोदी के साथ खड़े रहेंगे.
चुनाव परिणामों में महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा, जबकि एनडीए ने 125 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई. हालांकि 2020 के चुनाव में जेडीयू का प्रदर्शन कमजोर रहा और पार्टी सिर्फ 43 सीटों तक सिमट गई.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू के प्रदर्शन में गिरावट की एक बड़ी वजह चिराग पासवान थे.

दूसरे नंबर पर थी चिराग की पार्टी….

चिराग पासवान की पार्टी 9 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी. इनमें कस्बा, रुपौली, कड़वा, रघुनाथपुर, हरनौत, जगदीशपुर, बरहमपुर, दिनारा और ओबरा शामिल थीं.
कड़वा और कस्बा सीट कांग्रेस के खाते में गईं.
रुपौली और हरनौत पर बीजेपी ने जीत दर्ज की.
रघुनाथपुर, जगदीशपुर, बरहमपुर, दिनारा और ओबरा सीटें राजद ने जीती.

सीटों पर समीकरण बिगाड़े….

ऐसी 25 सीटें थीं, जहां जेडीयू दूसरे नंबर पर रही और उसकी हार का अंतर उतना ही था जितने वोट चिराग पासवान के उम्मीदवारों को मिले थे, यानी अगर लोजपा एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ती तो जेडीयू की झोली में ये सीटें जाती.

चिराग पासवान भले ही ज्यादा सीटें न जीत पाए हों, लेकिन 2020 का चुनाव उन्होंने जेडीयू के लिए मुश्किलें खड़ी कर दिया. उनका हनुमान वाला बयान चर्चा में रहा, लेकिन साथ ही यह भी साफ हुआ कि उनकी रणनीति ने बिहार की सियासत में एक बड़ा फर्क डाला दिया था.

 

 

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