Bihar assembly elections : केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बाद अब कांग्रेस के युवा नेता कन्हैया कुमार ने भी बिहार की राजनीति में अपनी सक्रिय भागीदारी का संकेत दे दिया है। कन्हैया कुमार ने स्पष्ट कहा है कि यदि पार्टी आदेश देगी, तो वह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव जरूर लड़ेंगे। इससे साफ हो गया है कि कांग्रेस अब कन्हैया को राज्य में एक प्रभावशाली चेहरा बनाने की तैयारी में है।
क्रिकेट से की राजनीति की तुलना
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कन्हैया कुमार ने राजनीति में चुनाव (Bihar elections) लड़ने की जिम्मेदारी को क्रिकेट से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह क्रिकेट में एक खिलाड़ी को बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है, वैसे ही राजनीति में भी चुनाव लड़ना, दूसरों को लड़वाना और प्रचार करना एक अहम जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता एक टीम प्लेयर होता है। अगर मेरी टीम का कप्तान कहेगा कि मैदान पर बल्लेबाजी करो तो मैं पैड पहनकर मैदान में उतर जाऊंगा। और अगर कहेगा कि ड्रिंक्स लेकर जाओ, तो मैं वो भी करूंगा।
Bihar elections : पार्टी के आदेश पर ही होगा फैसला
कन्हैया ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं लेंगे, बल्कि जो भी फैसला होगा, वह कांग्रेस आलाकमान की इच्छा पर आधारित होगा। पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, मैं उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। अगर पार्टी मुझे विधानसभा चुनाव में उतारना चाहेगी तो मैं तैयार हूं। उन्होंने कहा कि पहले भी जब उन्होंने चुनाव लड़ा था, वह पार्टी के निर्देश पर ही लड़ा था।
दो बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं कन्हैया
गौरतलब है कि कन्हैया कुमार दो बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन दोनों ही बार उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। पहली बार उन्होंने 2019 में बेगूसराय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा नेता गिरिराज सिंह से था, जिसमें उन्हें हार मिली। दूसरी बार उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की उत्तर-पूर्वी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर भाग लिया, लेकिन यहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
Bihar elections : बिहार कांग्रेस के लिए हो सकते हैं प्रमुख चेहरा
अब जब बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है, ऐसे में कन्हैया कुमार को कांग्रेस द्वारा एक प्रमुख युवा नेता के रूप में पेश किया जा सकता है। हालांकि, इस पर उन्होंने कहा कि पार्टी मुझे कोई विशेष दर्जा नहीं दे रही, बल्कि वही जिम्मेदारी दी जा रही है जो वह अपने अन्य लाखों कार्यकर्ताओं को देती है।
कन्हैया कुमार के इस बयान से इतना तो स्पष्ट हो गया है कि वे अब सिर्फ राष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि राज्य (Bihar elections) की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। उनके इस रुख को कांग्रेस की बिहार में खोई जमीन वापस पाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस उन्हें किस सीट से मैदान में उतारती है और क्या कन्हैया कुमार इस बार अपनी हार का सिलसिला तोड़ पाएंगे या नहीं।