Bihar Assembly Election: बिहार में अगले कुछ दिनों में विधानसभा चुनाव होने वाला है. जिसको लेकर जैसे-जैसे चुनावी मौसम नज़दीक आ रहा है, पूरे राज्य का माहौल राजनीति के रंग में रंगने लगा है ।देश की तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाला यह राज्य हमेशा से भारतीय लोकतंत्र की राजनीति का केंद्र रहा है. भाषा, संस्कृति और जातीय समीकरणों से लेकर आंदोलनों और राजनीतिक संघर्षों तक,बिहार की राजनीति हर बार चर्चा का विषय बनती रही है।
क्यों खास है बिहार की राजनीति?
बिहार का राजनीतिक इतिहास भारतीय लोकतंत्र में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है. वैशाली को लोकतंत्र का जन्मस्थल माना जाता है, क्योंकि यह दुनिया का सबसे पुराना गणराज्य हुआ करता था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार ने अहम भूमिका निभाई और जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन ने तो भारतीय राजनीति की दिशा ही बदल दी. यही कारण है कि बिहार को अक्सर भारतीय लोकतंत्र का आईना कहा जाता है।
2025 में चुनावी प्रक्रिया में क्या होगा नया?
चुनाव आयोग इस बार मतदान प्रक्रिया को और पारदर्शी और समावेशी बनाने की तैयारी कर रहा है । जिसके लिए महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित बूथ की व्यवस्था होगी तो दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर और विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ साथ मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. और डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया का पहले से कहीं अधिक व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे साफ है कि 2025 का चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं बल्कि लोकतंत्र की भागीदारी के लिहाज़ से भी खास होने वाला है।
विधानसभा की ताकत: 243 सीटों का गणित
बिहार भारत के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां विधानसभा द्विसदनीय है। निचला सदन विधानसभा है, जहां जनता सीधे अपने प्रतिनिधियों को चुनती है, जबकि ऊपरी सदन विधान परिषद है। बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, जो 38 जिलों में बंटी हुई हैं। इनमें से कई ज़िले और सीटें हमेशा से राजनीतिक दलों के लिए निर्णायक साबित होती रही हैं. पश्चिम और पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, पटना, सिवान, सारण, गोपालगंज और मगध क्षेत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां सबसे ज्यादा रहती हैं।
जिलोंवार विधानसभा सीटों का ब्योरा
पश्चिम चंपारण – 9 सीटें
पूर्वी चंपारण – 12 सीटें
शिवहर – 1 सीट
सीतामढ़ी – 6 सीटें
मधुबनी – 10 सीटें
सुपौल – 5 सीटें
अररिया – 6 सीटें
किशनगंज – 4 सीटें
पूर्णिया – 7 सीटें
कटिहार – 7 सीटें
मधेपुरा – 6 सीटें
खगड़िया – 6 सीटें
समस्तीपुर – 10 सीटें
दरभंगा – 10 सीटें
मुजफ्फरपुर – 11 सीटें
वैशाली – 8 सीटें
गोपालगंज – 6 सीटें
सिवान – 8 सीटें
सारण – 10 सीटें
भोजपुर – 7 सीटें
बक्सर – 4 सीटें
रोहतास – 7 सीटें
कैमूर – 4 सीटें
अरवल – 1 सीट
जहानाबाद – 4 सीटें
औरंगाबाद – 6 सीटें
गया – 10 सीटें
नालंदा – 7 सीटें
नवादा – 6 सीटें
पटना – 14 सीटें
लखीसराय – 2 सीटें
जमुई – 4 सीटें
शेखपुरा – 2 सीटें
मुंगेर – 3 सीटें
बेगूसराय – 7 सीटें
भागलपुर – 5 सीटें
बांका – 4 सीटें
सहरसा – 3 सीटें
बिहार विधानसभा की 243 सीटें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि वे जातीय समीकरणों, राजनीतिक रणनीतियों और जनता की सोच का प्रतिबिंब हैं. यही सीटें तय करेंगी कि 2025 के चुनाव के बाद बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथों में होगी.