Rafiganj vidhanshabha seat: बिहार की राजनीति में रफीगंज विधानसभा सीट औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्रके अंतर्गत हमेशा से दिलचस्प मुकाबला का केंद्र रही यह सीट अपने बदलते राजनीतिक समीकरणों और चौंकाने वाली नतीजे के लिए जानी जाती है.
1952 में पहली बार रफीगंज सीट पर चुनाव हुआ शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा रहा. 1957 तक यही स्थिति बनी रही फिर, 1962 में स्वतंत्र पार्टी ने जीत दर्ज की लेकिन कांग्रेस ने वापसी करते हुए 1967 में फिर जीत हासिल की, 1969 के चुनाव में भारतीय जन संघ (BJS) ने अपनी जीत बुलंद की. हालांकि, 1972 में कांग्रेस ने फिर वापसी की 1977 के चुनाव में जनता पार्टी (JNP) में हुसैन अंसारी ने जीत हासिल की.
पिछले 2 विधानसभा चुनाव के नतीजे
2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में रफीगंज सीट से जनता दल यूनाइटेड की अशोक कुमार सिंह ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने प्रमोद कुमार सिंह को 9525 वोटो की बढ़त से हराया था मतदान प्रतिशत लगभग 52.52% दर्ज किया गया था उस टाइम पर, वही 2020 में स्पीड का रंग और दिशा दोनों बदल गए राष्ट्रीय जनता दल के मोहम्मद निहालुद्दीन ने इस बार मैदान में कदम रखा और निर्दलीय प्रत्याशी प्रमोद कुमार सिंह को 9429 वोटो की बढ़त से हरा दिया निहालुद्दीन को कल 63 25 वोट मिले जबकि प्रमोद कुमार को 53896 वोट मिले मतदाता प्रतिशत लगभग 55.78 प्रतिशत रहा.
2025 विधानसभा चुनाव और आगे की चुनौतियां
रफीगंज में राजनीतिक जमीन अब पहले से भी अधिक संवेदन सील हो गई है पिछले कई चुनाव में देखा गया है, कि जनता दल और राजद दोनों सीट पर मजबूत पकड़ जमाने की कोशिश करती आ रही है. 2025 में महागठबंधन की ओर से राजद और एनडीए की ओर से जदयू की टक्कर के बीच एक और दिलचस्प मुकाबला संभव है जहां एक तरफ नई पार्टी भी होगी.
रफीगंज विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति का ऐसा सूक्ष्म पैमाना है जो बड़े बदलाव का पूर्व आभाष कर देता है 2015 में जदयू की जी 2020 में राजद की वापसी या सब स्पीड की अस्थिरता और मतदाताओं के निर्णायक भूमिका को दर्शाती है आदमी चुनाव में यह देखना होगा कि उम्मीदवारों के नाम घोष की घोषणा हो वही सीट पर कौन सी पार्टी स्थाई प्रभाव जमा पाती हैं.