Maithili Thakur: इन दिनों बिहार की मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर काफी चर्चे में है. इस बार वजह उनकी आवाज नही, बल्कि राजनीतिक गलियारों में उनकी संभावित एंट्री हैं. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भारतीय जनता पार्टी मैथिली ठाकुर को अपने साथ जोड़ने की योजना बना रही है. जिससे राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है.
कौन हैं मैथिली ठाकुर?
बिहार के मधुबनी जिले के छोटे से गांव बेनीपट्टी में 25 जुलाई 2000 को जन्मी एक बच्ची को शायद ही किसी ने सोचा होगा, कि एक दिन वह न सिर्फ संगीत बल्कि राजनीति की दुनिया में भी सुर्खियां बटोरेंगी. मैथिली के पिता रमेश ठाकुर एक संगीतकार और संगीत शिक्षक है उनकी माता भारती ठाकुर एक ग्रहणी है, और मैथिली के दो छोटे भाई ऋषभ और आयाची भी संगीत से ही जुड़े हुए हैं, और तीनों मिलकर अक्सर परफॉर्मेंस करते हैं.
कैसे शुरू हुआ रियलिटी शो से रियल स्टार तक का सफर
संघर्ष से भरा यह सफर 2011 में जब मैथिली सिर्फ 11 साल की थी तब उन्होंने ज़ी टीवी के रियलिटी शो सारेगामापा लिटिल चैंप्स में हिस्सा लिया था. हालांकि, वह खिताब नहीं जीत पाई थी. लेकिन, उनकी प्रतिभा ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया था. फिर 2017 में मैथिली ने राइजिंग स्टार सीजन 1 में भाग लिया, और फाइनल में रनर अप रही. उनका गाया ओम नमः शिवाय इतना फेमस हुआ, कि उन्हें सीधा फाइनल में एंट्री मिल गई. इसके बाद मैथिली ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा उन्होंने मैथिली, हिंदी, बंगाली, भोजपुरी, उर्दू, मराठी, पंजाबी, तमिल, और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में गीत गाया, आज उनके इंस्टाग्राम पर 60 लाख से अधिक फॉलोअर्स है, और फेसबुक पर 88 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स है.
सम्मान और पुरुस्कार
मैथिली ठाकुर को उनकी प्रतिभा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है. 2019 में उन्हें और उनके दोनों भाइयों को चुनाव आयोग द्वारा मधुबनी का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने मैथिली को बिहार के लिए “स्टेट आइकॉन” नियुक्त किया. जहां उन्हें मतदाता जागरूकता अभियान चलाने की जिम्मेदारी मिली. इसके अलावा 8 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से नेशनल क्रिएटर अवार्ड 2024, में “कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर” का सम्मान दिया गया.
राजनीत एंट्री में अटकलें, क्या हैं सच्चाई?
हाल ही में मैथिली ठाकुर की मुलाकात बिहार के भाजपा प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से हुई. इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया, कि मैथिली जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकती हैं.
विनोद तावड़े ने मैथिली से मुलाकात के बाद X पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें लिखा साल 1995, बिहार में लालू राज आने पर जो परिवार बिहार छोड़कर चले गए, उस परिवार की बिटिया सुप्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर बदलते बिहार की रफ्तार को देखकर फिर से बिहार आना चाहती है. आज गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और मैंने उनसे आग्रह किया, कि बिहार की जनता के लिए और बिहार के विकास के लिए, उनका योगदान बिहार का सामान्य आदमी अपेक्षा करता है और वे उनकी अपेक्षाओं को पूरा करें. इनका यह बयान मैथिली के राजनीति में आने का सीधा निमंत्रण माना जा रहा है.
मैथिली के सीट पे सस्पेंस
मैथिली अगर भाजपा से चुनाव लड़ती हैं तो सबसे बड़ी अटकलें तो यह है, कि वह कौन सी सीट से लड़ेंगी. जहां कुछ सूत्रों के अनुसार भाजपा मैथिली की अलीनगर सीट से उतरने पर विचार कर रही हैं, तो वही मैथिली मधुबनी जिले के बेनीपट्टी के रहने वाली है , इसलिए स्वाभाविक रूप से चर्चा में है. हालांकि बेनीपट्टी में वर्तमान में भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद नारायण झा विधायक है. अगर पार्टी उन्हें फिर से टिकट देती है तो मैथिली के लिए दूसरी सीट की तलाश करनी होगी.
मैथिली की राजनीति एंट्री महत्वपूर्ण या फिर चुनौती भरे सवाल
मैथिली ठाकुर 25 वर्ष की है और युवा पीढ़ी में अत्यंत लोकप्रिय है. उनकी मैथिली और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में गहरी पकड़ उन्हें बिहार की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनती है. जहां आज के डिजिटल युग में मैथिली की विशाल ऑनलाइन फॉलोइंग एक बड़ा फायदा हो सकती है. उनके लाखों फॉलोअर्स उनकी राजनीतिक संदेश को तेजी से फैलने में मदद कर सकते हैं. यह डिजिटल पहुंच आधुनिक चुनावी रणनीति से में बेहद महत्वपूर्ण जगह बनती है. बिहार में महिला नेताओं की कमी को देखते हुए मैथिली जैसी युवा शिक्षित और लोकप्रिय महिला की राजनीति में एंट्री एक सकारात्मक संदेश देगी.
और वहीं दूसरी तरफ चुनौती भरे सवाल यह है, कि मनोरंजन जगत से राजनीति में आना हमेशा आसान नहीं होता. मैथिली को शासन और राजनीतिक जटिलताओं को समझना होगा. उन्हें एक मजबूत राजनीतिक विजन प्रस्तुत करना होगा. उनकी राजनीतिक एंट्री पर निश्चित रूप से सवाल उठेंगे विरोधी पार्टियों इसे सिर्फ स्टार पावर का इस्तेमाल करार दे सकती है. मैथिली को अपनी गंभीरता और संपर्पण साबित करना होगी.
बीजेपी की रणनीति
बिहार में बीजेपी की यह रणनीति कि, वह लोकप्रिय और प्रभावशाली चेहरे को राजनीति में लाकर अपनी पकड़ मजबूत बना सकते हैं. पवन सिंह के बाद मैथिली ठाकुर की संभावित एंट्री इस रणनीति का हिस्सा है. युवा मतदाता अब चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभाते आ रहे हैं. मैथिली जैसे युवा और लोकप्रिय चेहरे से पार्टी इस वर्ग को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखो की घोषणा के बाद ही मैथिली की राजनीतिक एंट्री को लेकर स्पष्टता आएगी. पार्टी अभी विचार विमर्श के चरण में है, और अंतिम फैसला जल्दी लिया जा सकता है.
मैथिली ठाकुर की राजनीति एंट्री अभी अटकलों के दायरे में है. लेकिन संकेत काफी मजबूत है. उनकी लोकप्रियता, युवा अपील, सांस्कृतिक प्रभाव और डिजिटल पहुंच, उन्हें एक आकर्षक राजनीतिक उम्मीदवार बनाती है. बीजेपी के लिए यह रणनीतिक दावं हो सकती है, जो युवा और सांस्कृतिक मतदाताओं को जोड़ने में मददगार साबित हो सकती है.
बिहार की यह बेटी जिसने अपनी आवाज से लाखों दिल जीते हैं क्या राजनीति के मंच पर भी वही जादू बिखेर पाएगी? यह सवाल अभी अनुत्तरित है, लेकिन निश्चित रूप से बिहार की राजनीति में एक नया और रोचक मोड़ आने वाला है.