लेबर स्टेट… पिछड़ा राज्य… और अब कंज्यूमिंग स्टेट.. NDA सरकार में कब विकास का पर्याय बनेगा बिहार ? 

बिहार क्या है…? इस सवाल का जवाब हर दौर में बदल जाता है और लोग ठीक ठीक लगा लेते है. जैसे कभी इसे लेबर स्टेट कहा जाता है तो कभी पिछड़ा राज्य …कई उपमाओं का उपमेय वाला इस राज्य को देश की वित्त मंत्री ने कंज्यूमिंग स्टेट के रूप में एक और पहचान दी है. हंसी आती है कि अपने शब्दकोश से अंग्रेजी के भारी भरकम शब्द का इस्तेमाल वो उस राज्य के लिए कर रही हैं जहां दसवीं तक अंग्रेजी पढ़ने की कोई अनिवार्यता नहीं हैं और यह वही बिहार है जहां पिछले 22 सालों से एनडीए सत्ता में है और पिछले 11 सालों से केंद्र में भी वही सरकार है.

यानी डबल इंजन का नारा सिर्फ भाषण तक सीमित नहीं है यह जमीन पर मजबूती से गूंज रहा है. मगर हैरत की बात यह है कि इतने लंबे शासन के बाद भी NDA की इस सरकार के लिए  बिहार की पहचान सिर्फ उपभोग करने वाले राज्य की है. सोचिए जिस बिहार से देश को सबसे अधिक मजदूर मिलते हैं, जिस बिहार की मेहनत से दूसरे राज्यों की अर्थव्यवस्था चलती है, उसी बिहार को कंज्यूमिंग स्टेट का तमगा थमा दिया जाता है तो इस राज्य के नागरिकों को कितना दर्द होता होगा….

अब राजनीति का रंग होता ही थोड़ा अजीब है.जानकार कहते हैं इसका रंग किसी सफेद कपड़े पर काले रंग का धब्बा जैसा होता जरूर है लेकिन यह खुली आंखों से सबको दिखाई भी नहीं देता. नहीं तो जब वित्त मंत्री कहती हैं कि टैक्स कटौती से त्योहारों में लोग ज़्यादा सामान खरीद पाएंगे और बिहार जैसे राज्यों को फायदा मिलेगा तो वो एक सवाल को अनदेखा करने की पूरी कोशिश करते हैं. हालांकि जिस साक्षात्कार की बात मैं कर रहा हूं वहां उनसे पूछा भी नहीं गया.मैं पूछ लेता हूं…

सवाल है,फायदा किसका होगा? उद्योगपतियों का या फिर नेताओं का? क्योंकि जनता का फायदा तो नहीं दिख रहा है… और सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दूसरे राज्य विकास की दौड़ में आगे निकल गए तो बिहार क्यों पिछड़ गया? जब दूसरे राज्य उद्योग और निवेश में आगे बढ़ रहे हैं बिहार सिर्फ उपभोक्ता तक सीमित क्यों रह गया है…

किसी छोटे कार्यकर्ता से लेकर से बड़े पदों से आसीन मंत्री जब देश के दूसरे हिस्से में जाते हैं तो मंच से उद्योग और निवेश की बातें करने वाले नेताओं के भाषण से ये शब्द क्यों गायब हो जाती है…क्या बिहार के लोग सिर्फ वोट बैंक हैं?

खैर, चुनाव सिर पर हैं तो सरकार ने GST सुधार और कर कटौती को नई ढाल बना लिया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि यह ढाल चुनावी रणभूमि में कितना कारगर साबित होती है,बिहार की जनता के लिए या सिर्फ सियासत के लिए…

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