NEET Paper Leak : नीट पेपर लीक मामले में एक तरफ जहां छात्रों में आक्रोस है वहीं इस मामले में राजनीति भी जारी है. मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई जारी है. ताजा घटनाक्रम में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल की गिरफ्तारी ने इस मामले को एक बार फिर राजनीतिक रंग दे दिया है. जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर लीक नेटवर्क केवल शिक्षा माफिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार राजनीतिक प्रभाव और चुनावी महत्वाकांक्षाओं से भी जुड़े हो सकते हैं. इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन किसी सक्रिय राजनीतिक दल से जुड़े नेता की गिरफ्तारी ने बहस को और तेज कर दिया है. विपक्ष और सत्ता पक्ष एक-दूसरे पर पेपर लीक माफिया को संरक्षण देने के आरोप लगाते रहे हैं.
राजस्थान से शुरू हुई थी शुरुआती जांच
NEET पेपर लीक मामले की शुरुआती कड़ियां राजस्थान के सीकर और जयपुर से जुड़ी बताई गई थीं. जांच के दौरान दिनेश विश्नोई और उसके भाई की गिरफ्तारी हुई थी. उस समय कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि दिनेश भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) से जुड़ा हुआ है. हालांकि भाजपा ने इन आरोपों से साफ इनकार किया था. इसके बाद बिहार की राजनीति में भी यह मामला बड़ा मुद्दा बन गया. RJD नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि जिन राज्यों में भाजपा या NDA की सरकार है, वहां पेपर लीक माफिया सक्रिय हैं और उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है.
2024 में भी उठे थे राजनीतिक संबंधों के सवाल
यह पहली बार नहीं है जब NEET पेपर लीक मामले में राजनीतिक संबंधों की चर्चा हुई हो. 2024 में बिहार के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया था कि तेजस्वी यादव के करीबी लोगों ने सॉल्वर गैंग के लिए गेस्ट हाउस बुक कराया था. हालांकि उस मामले में जांच एजेंसियों को पर्याप्त सबूत नहीं मिले और मामला आगे नहीं बढ़ सका. जांच के दौरान सबसे चर्चित नाम संजीव मुखिया का सामने आया, जिसे 2024 NEET पेपर लीक का कथित किंगपिन बताया गया. संजीव मुखिया का सीधा राजनीतिक संबंध सामने नहीं आया, लेकिन उसकी पत्नी का स्थानीय राजनीति से जुड़ाव चर्चा में रहा.
संतोष कुमार जायसवाल पर क्या आरोप?
CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए संतोष कुमार जायसवाल पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन क्षेत्र के रहने वाले बताए जाते हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार, उन्होंने कई अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने का भरोसा देकर 20 से 30 लाख रुपये तक की मांग की थी. मीडिया सूत्रों का दावा है कि जायसवाल रक्सौल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. इसी वजह से जांच एजेंसियां इस एंगल की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं अवैध कमाई का इस्तेमाल राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तो नहीं किया जा रहा था. हालांकि अभी तक CBI ने आधिकारिक तौर पर चुनावी फंडिंग या राजनीतिक उद्देश्य से जुड़े किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है. जांच अभी जारी है.
पेपर लीक का बढ़ता नेटवर्क और राजनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होते हैं और मेडिकल शिक्षा में प्रवेश को लेकर भारी प्रतिस्पर्धा रहती है. इसी वजह से पेपर लीक रैकेट में करोड़ों रुपये का लेनदेन संभव हो पाता है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क में दलाल, शिक्षा माफिया, तकनीकी विशेषज्ञ और स्थानीय प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं. कई मामलों में राजनीतिक संपर्क इन नेटवर्क को सुरक्षा कवच देने का काम भी करते हैं. हालांकि यह भी सच है कि अभी तक किसी बड़े राजनीतिक दल के शीर्ष नेतृत्व की सीधी संलिप्तता साबित नहीं हुई है. लेकिन अलग-अलग दलों से जुड़े नेताओं के नाम सामने आने के कारण सभी राजनीतिक दलों पर सवाल उठ रहे हैं.
छात्रों पर सबसे ज्यादा असर
पेपर लीक के मामलों का सबसे बड़ा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ता है जो वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं. परीक्षा रद्द होने या दोबारा परीक्षा आयोजित होने की स्थिति में छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार पेपर लीक और अनिश्चितता के कारण कई छात्र तनाव और अवसाद का सामना करते हैं. अभिभावकों में भी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ रही है. CBI अभी 2024 NEET पेपर लीक मामले की जांच कर रही है और कई पहलुओं पर पूछताछ जारी है. दिलचस्प बात यह है कि कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण जमानत मिल चुकी है. अब संतोष कुमार जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं. राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन जांच के दायरे में अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े लोगों के आने से यह साफ हो रहा है कि पेपर लीक का नेटवर्क किसी एक दल या राज्य तक सीमित नहीं है. फिलहाल देशभर के छात्र और अभिभावक इस उम्मीद में हैं कि जांच एजेंसियां जल्द सच्चाई सामने लाएंगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाएगी.