OTT vs Theatre : पहले फिल्में थिएटर रिलीज, म्यूजिक और सैटेलाइट राइट्स से कमाई करती थीं, लेकिन ओटीटी (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म के आने से यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है. डिजिटल राइट्स ने न सिर्फ दर्शकों की फिल्में देखने की आदतें बदली हैं, बल्कि थिएटर बिजनेस को भी नई चुनौती दी है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या ओटीटी ने फिल्म इंडस्ट्री के लिए नए मौके बनाए हैं, या इससे थिएटर बिजनेस को नुकसान हुआ है? क्या अब फिल्में सिर्फ सिनेमाघरों के लिए बनती हैं, या ओटीटी के लिए? और प्रोड्यूसर्स के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद मॉडल कौन सा है? आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं.
OTT vs Theatre : फिल्मों की कमाई के स्रोत
- थिएटर राइट्स
फिल्मों की सबसे बड़ी कमाई सिनेमाघरों से होती थी. जितने ज्यादा टिकट बिकते, उतनी ज्यादा कमाई होती. मल्टीप्लेक्स में टिकट महंगे होते हैं, जबकि सिंगल स्क्रीन थिएटर में फिल्म देखने के लिए कम दाम चुकाने पड़ते हैं. तो फिल्म की रिलीज डेट, फेस्टिवल सीजन और प्रचार रणनीति भी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर असर डालते हैं. बड़े बजट की फिल्में आमतौर पर त्योहारों या छुट्टियों के दौरान रिलीज की जाती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा दर्शक सिनेमाघरों में आएं.
- सैटेलाइट राइट्स
थिएटर रिलीज के बाद फिल्मों के सैटेलाइट राइट्स करोड़ों में बिकते हैं.यह सौदा मुख्य रूप से फिल्म की स्टार कास्ट और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर निर्भर करता है. बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्मों को प्रमुख टीवी चैनल्स भारी कीमत पर खरीदते हैं.
- म्यूजिक राइट्स
अगर फिल्म का संगीत हिट हो जाए, तो म्यूजिक कंपनियां इसके राइट्स खरीदने के लिए बड़ी रकम चुकाती हैं. गाने की स्ट्रीमिंग, टेलीविजन और रेडियो प्लेबैक से भी अच्छी खासी कमाई होती है.
- ओवरसीज राइट्स
भारतीय फिल्मों की विदेशों में भी अच्छी मांग रहती है. खासकर खाड़ी देश, अमेरिका, कनाडा और यूके जैसे बाजारों में बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों की अच्छी खासी कमाई होती है. स्टार कास्ट और कंटेंट पर निर्भर करता है कि फिल्म कितने करोड़ की ओवरसीज कमाई करेगी.
- ब्रांड पार्टनरशिप और इन-फिल्म प्रमोशन
फिल्मों में अब ब्रांड प्रमोशन भी आम हो गया है.कई ब्रांड अपनी पहचान बनाने के लिए फिल्मों में अपने प्रोडक्ट को प्रमोट कराते हैं.जैसे हीरो किसी खास ब्रांड की कार चलाता है, या किसी सॉफ्ट ड्रिंक को प्रमोट करता है. इसके बदले फिल्म को अच्छी रकम मिलती है.
OTT vs Theatre : कमाई का नया जरिया
- डिजिटल राइट्स
अब थिएटर के अलावा फिल्में सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी रिलीज होती हैं. नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम वीडियो, डिज़्नी+ हॉटस्टार और ज़ी5 जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म फिल्म के डिजिटल राइट्स के लिए करोड़ों में डील करते हैं. कई प्रोड्यूसर्स अब थिएटर रिलीज के बजाय सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में लॉन्च कर रहे हैं, जिससे उन्हें बॉक्स ऑफिस रिस्क लेने की जरूरत नहीं होती.
- हाइब्रिड मॉडल
कुछ फिल्में (OTT vs Theatre) पहले थिएटर में रिलीज होती हैं और फिर कुछ हफ्तों के बाद ओटीटी पर उपलब्ध हो जाती हैं.इससे दोनों प्लेटफॉर्म से अच्छी कमाई हो सकती है. कुछ हाई-प्रोफाइल फिल्में पहले सिर्फ थिएटर में आती हैं और फिर कुछ समय बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होती हैं.
ओटीटी ने थिएटर बिजनेस को नुकसान पहुंचाया है?
ओटीटी (OTT ) ने दर्शकों को घर बैठे मनोरंजन का विकल्प दिया है, जिससे थिएटर में दर्शकों की संख्या पर असर पड़ा है. कोविड-19 महामारी के बाद, कई दर्शकों ने थिएटर की जगह ओटीटी को प्राथमिकता दी. हालांकि, बड़े बजट की फिल्में और मल्टीप्लेक्स कल्चर अभी भी थिएटर बिजनेस को बनाए हुए हैं. ब्लॉकबस्टर फिल्मों की रिलीज पर अब भी दर्शक सिनेमाघरों में जाते हैं.
नए दौर में फिल्म इंडस्ट्री का सबसे फायदेमंद मॉडल कौन सा है?
फिल्म प्रोड्यूसर्स के लिए सबसे फायदेमंद मॉडल अब हाइब्रिड रिलीज़ मॉडल हो सकता है. थिएटर रिलीज से शुरुआती कमाई होती है और बाद में ओटीटी और सैटेलाइट राइट्स से अतिरिक्त मुनाफा कमाया जाता है. कुछ फिल्में जो थिएटर में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पातीं, वे ओटीटी पर हिट हो जाती हैं और वहां से अच्छा रेवेन्यू जेनरेट करती हैं.
ओटीटी प्लेटफॉर्म (OTT vs Theatre) ने फिल्म इंडस्ट्री के लिए नए अवसर खोले हैं, लेकिन इससे थिएटर बिजनेस को चुनौती भी मिली है. अब फिल्में सिर्फ थिएटर या सिर्फ ओटीटी के लिए नहीं बनतीं, बल्कि हाइब्रिड मॉडल पर काम किया जाता है. प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को अब अपनी फिल्म के लिए सबसे उपयुक्त रिलीज़ रणनीति चुननी होगी ताकि उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके.