दुनिया का भविष्य तय करेंगे भारत और चीन…! रिश्तों में आए नए बदलाव का क्या है नया संकेत

India China relations : भारत और चीन के बीच हाल के महीनों में बढ़ी बातचीत और आर्थिक गतिविधियों के बीच एक अहम राय सामने आई है। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि भारत और चीन न केवल पड़ोसी हैं, बल्कि आने वाले समय में दुनिया के भविष्य को मिलकर आकार देने वाले साझेदार बन सकते हैं। लेख में चीन की नई 15वीं पंचवर्षीय योजना और भारत की विकसित भारत 2047 नीति को ऐसे दो समानांतर रोडमैप बताया गया है, जो एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

बड़े क्षेत्र जहां बढ़ सकती है भारत-चीन साझेदारी

  • व्यापार में बढ़त

जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच भारत-चीन व्यापार 127.63 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 11% ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में संभावनाओं को दिखाती है।

  • उद्योग और तकनीक में सहयोग

लेख में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों की ताकतें अलग-अलग हैं, लेकिन एक-दूसरे को मजबूत कर सकती हैं. जैसे चीन इलेक्ट्रॉनिक्स, अवसंरचना, नई ऊर्जा तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है तो भारत आईटी, सॉफ्टवेयर, बायोफार्मा, स्टार्टअप इनोवेशन में दुनिया को नया रास्ता दिखा सकता हैं. इन क्षेत्रों में साथ आने से भारत-चीन वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

  • लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक रिश्ते

दोनों देश के बीच सही होते रिश्तों के कारण पर्यटन में बढ़ोतरी, वीजा बहाली, दोनों देशों के बीच फ्लाइटें बढ़ना, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की यात्राओं का नए सिरे से शुरू होना, इन संकेतों को सकारात्मक माहौल के रूप में देखा जा रहा है। जिसका असर दुनिया पर पड़ेगा

  • वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने की संभावना

BRICS, SCO और G20 जैसे मंचों पर दोनों देश पहले से साथ काम कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भारत-चीन बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

भारत-चीन राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष

2025 में भारत-चीन राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे है और अब यह दोनों देश के बीच रिश्तों को नए सिरे से देखने का मौका है। हाल ही में चीन के राजनयिक बयानों में भी यह संकेत मिला है कि बीजिंग भारत के साथ स्थिर और स्वस्थ संबंध चाहता है और दोनों देशों के बीच बातचीत बढ़ाने को तैयार है। रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान तनावों के बावजूद दोनों देशों में आर्थिक और रणनीतिक रूप से एक-दूसरे के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं।

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