Third world countries : वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के पास हुए एक हमले के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि थर्ड वर्ल्ड देशों के नागरिकों पर अमेरिका आने को लेकर स्थायी रोक लगाई जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किन देशों को थर्ड वर्ल्ड मानते हैं। इस बयान के बाद पूरी दुनिया में यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर थर्ड वर्ल्ड देश कौन से होते हैं और क्या भारत भी उनमें शामिल है।
क्या होता है थर्ड वर्ल्ड का मतलब ?
थर्ड वर्ल्ड यानी तीसरी दुनिया कोई आधिकारिक या कानूनी शब्द नहीं है। यह एक पुरानी राजनीतिक और आर्थिक अवधारणा है, जिसका इस्तेमाल 1950 के दशक में शुरू हुआ था। इस शब्द का पहली बार इस्तेमाल 1952 में फ्रांसीसी जनसांख्यिकी विशेषज्ञ अल्फ्रेड सॉवी ने किया था। उन्होंने थर्ड वर्ल्ड की तुलना फ्रांस की आम जनता (तीसरे एस्टेट) से की थी, जो शोषित और उपेक्षित थी लेकिन आगे बढ़ना चाहती थी। यानी शुरुआत में यह शब्द उन देशों के लिए इस्तेमाल हुआ जो न तो अमेरिका के नेतृत्व वाले पूंजीवादी गुट में थे और न ही सोवियत संघ के नेतृत्व वाले कम्युनिस्ट गुट में यानी शीत युद्ध के समय जो देश दोनों गुटों से अलग थे, उन्हें थर्ड वर्ल्ड कहा गया।
समय के साथ बदलता गया थर्ड वर्ल्ड का मतलब
धीरे-धीरे थर्ड वर्ल्ड शब्द का इस्तेमाल गरीब, पिछड़े और विकासशील देशों के लिए होने लगा। लेकिन आज के दौर में इस शब्द को पुराना और अपमानजनक माना जाता है। साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने साफ कहा था कि थर्ड वर्ल्ड शब्द अब पुराना और अपमानजनक हो चुका है। अब हम ग्लोबल साउथ या विकासशील देशों की बात करते हैं।आज की दुनिया में देशों को आमतौर पर इन श्रेणियों में बांटा जाता है.
- विकसित देश (Developed Countries)
- विकासशील देश (Developing Countries)
- कम विकसित देश (Least Developed Countries – LDC)
संयुक्त राष्ट्र की सूची के अनुसार दुनिया में इस समय 44 देश सबसे कम विकसित श्रेणी में आते हैं। इनमें से 32 देश अफ्रीका से , 8 देश एशिया से ,1 देश कैरिबियन से और 3 देश प्रशांत महासागर क्षेत्र से आते हैं. इन देशों में आमतौर पर प्रति व्यक्ति आय बहुत कम होती है,गरीबी ज्यादा होती है,उद्योग और बुनियादी ढांचा कमजोर होता है और राजनीतिक अस्थिरता रहती है.
क्या भारत थर्ड वर्ल्ड देश है?
इसका सीधा और साफ जवाब है नहीं क्योंकि भारत आज के समय में एक उभरती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था है.दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है औऱ आने वाले वर्षों में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहा है.हालांकि ऐतिहासिक रूप से देखें तो शीत युद्ध के दौर में भारत गुट-निरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) का हिस्सा था, इसलिए उस समय भारत को थर्ड वर्ल्ड देशों की श्रेणी में रखा जाता था। लेकिन आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से आज भारत उस श्रेणी में बिल्कुल नहीं आता। हाँ, यह भी सच है कि भारत में आर्थिक असमानता अब भी एक बड़ी चुनौती है. गरीबी और अमीरी के बीच बड़ा फासला मौजूद है लेकिन इसके बावजूद भारत को आज विकासशील या उभरती अर्थव्यवस्था कहा जाता है, न कि थर्ड वर्ल्ड।