अमेरिका के दम पर भारत को गीदड़भभकी दे रहा पाक ! क्या अपनी धमकियों को अंजाम देने की स्थिति में है पाकिस्तान?

PM Modi : 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान (Pakistan) समर्थित आतंकियों ने 26 पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी. इस आतंकी हमला के बाद भारत-पाक के बीच तनाव इस कदर बढ़ गया कि दोनों देश कूटनीतिक युद्ध की दहलीज़ तक पहुंच गए और भारत ने हमले के बाद प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए, 65 साल पुराना सिंधु जल संधि निलंबित कर दिया, अटारी बॉर्डर सील कर दिए गए, और पाक नागरिकों के वीज़ा भी रद्द कर दिए.

क्या Pakistan अपनी धमकियों को अंजाम देने की स्थिति में है?

इन कड़े कदमों का जवाब पाकिस्तान ने परमाणु हमले की धमकी देकर दिया. पाक रेल मंत्री हनीफ अब्बासी ने कहा—हमारे पास दुनिया का सबसे शक्तिशाली परमाणु बम है. इसे हमने सजाने के लिए नहीं रखा है…वहीं कुछ पाक के पूर्व राजनयिकों ने सामरिक परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की बात कही. पानी रोके जाने पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने तो यहां तक कहा कि अगर पानी नहीं बहा, तो खून बहेगा.

लेकिन क्या पाकिस्तान इन धमकियों को अंजाम देने की स्थिति में है? IISS की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास 12 लाख सक्रिय सैनिक , 730+ फाइटर जेट्स, ट्राई लेयर एयर डिफेंस सिस्टम और $78.7 बिलियन रक्षा बजट है जबकि पाकिस्तान का बजट है सिर्फ $7.6 बिलियन है. इन मामलों में भारत पाक से 10 गुणा ज्यादा शक्तिशाली है…

प्रमुख मुस्लिम देश का भी पाकिस्तान को खुला समर्थन नहीं

लेकिन अपनी गीदड़भभकी नाकाम होते देख पाकिस्तान ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी सहयोगियों को लामबंद करने की कोशिश की लेकिन सीधे तौर पर कोई भी भारत से भिड़ने और पाक को साथ देने की बात नहीं कही…एक ओर जहां चीन ने PL-15 मिसाइलें भेजीं लेकिन भारत से सीधी भिड़ंत से दूरी बनाए रखी तो तुर्की ने पाक की मदद की खबरों का खंडन किया हालांकि ईरान ने दोनों देश के बीच मध्यस्थता की पेशकश की सऊदी अरब भी तटस्थ रहा. वहीं पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देश उसका खुलकर समर्थन करेंगे. हालांकि, सऊदी अरब ने भी तटस्थ रुख अपनाया. दोनों देशों से तनाव कम करने की अपील की. किसी भी प्रमुख मुस्लिम देश ने पाकिस्तान का खुला समर्थन नहीं किया.

Pakistan की उम्मीदों पर पानी फेर सकता है अमेरिका

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान अब अमेरिका की ओर देख रहा है. लेकिन अमेरिका ने हाल ही में पाक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. भारत-अमेरिका के बीच मजबूत सैन्य साझेदारी—$20 बिलियन के रक्षा सौदे—पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फेर सकते हैं.

उधर भारत का संदेश साफ है कि अब फैसला पाकिस्तान के हाथ में है—या तो वह आतंक को छोड़ शांति की राह चुने…या भारत की चेतावनियां सिर्फ शब्द से बदलकर कार्रवाई बन जाएंगी

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