Pakistan economy : भारत द्वारा हाल ही में पाकिस्तान के आतंकी हमलों की नाकाम कोशिशों के जवाब में की गई कड़ी कार्रवाई ने पाकिस्तान को रणनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर भारी नुकसान पहुंचाया है। भले ही पाकिस्तान की सरकार इसे सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करने से बच रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
पाकिस्तानी मंत्री और अधिकारी लगातार नुकसान को कम आंकने और छिपाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि भारत की सैन्य कार्रवाई का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कोई दीर्घकालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वित्त वर्ष के भीतर ही आर्थिक झटकों की भरपाई कर ली जाएगी।
IMF से मिली राहत, लेकिन कर्ज का बोझ बरकरार
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही गंभीर है और दुनिया भर में उसकी कंगाली को लेकर चर्चा होती रही है। ऐसे समय में जब देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है, इंटरनेशनल मोनेट्री फंड (IMF) ने 10 मई को पाकिस्तान को 2.3 बिलियन डॉलर का राहत पैकेज मंजूर किया है। दिलचस्प बात यह है कि इस लोन को मंजूरी देते वक्त भारत ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
IMF की इस मदद में से 1 बिलियन डॉलर, पहले से निर्धारित 7 बिलियन डॉलर के पैकेज की एक किश्त है, जिसकी सहमति साल 2023 में हुई थी। शेष 1.4 बिलियन डॉलर की राशि क्लाइमेट रेजिलिएंस फैसिलिटी के अंतर्गत दी गई है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को पर्यावरणीय आपदाओं से निपटने में मदद देना है। हालांकि, इस आर्थिक राहत के बावजूद पाकिस्तान पर 73.69 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का भारी-भरकम कुल कर्ज बना हुआ है। यह आंकड़ा हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान द्वारा जारी किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि देश की वित्तीय चुनौतियां अभी भी विकराल रूप में बनी हुई हैं।
अमेरिका से व्यापार बढ़ाने की कोशिशें
वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने एक इंटरव्यू में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि पाकिस्तान की अमेरिका के साथ व्यापारिक वार्ताएं जारी हैं। उनका कहना है कि जल्द ही इसमें कुछ सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अमेरिका से हाई क्वालिटी कपास, सोयाबीन, हाइड्रोकार्बन और अन्य जरूरी वस्तुएं आयात करने पर विचार कर रहा है।
Pakistan economy : अर्थव्यवस्था पर सीमित असर?
भारत के साथ हालिया सैन्य तनाव को लेकर औरंगजेब ने कहा कि यह एक “शॉर्ट ड्यूरेशन एस्केलेशन” था, यानी इसका असर अस्थायी और सीमित रहेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की आर्थिक नीति में इस कारण कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा।
इसी कड़ी में जब उनसे इंडस वॉटर ट्रीटी (Operation Sindoor) को भारत द्वारा निलंबित किए जाने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि इसका तात्कालिक असर पाकिस्तान पर नहीं पड़ेगा। साथ ही यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान ऐसी किसी बातचीत का हिस्सा नहीं बनेगा जिसमें संधि की बहाली पर चर्चा न की जाए। वित्त मंत्री ने विश्वास जताया कि इंडस वॉटर ट्रीटी जल्द बहाल हो सकती है। जहां एक ओर पाकिस्तान की सरकार और वित्त मंत्री स्थिति को नियंत्रित और स्थिर दिखाने की कोशिश में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति और भारत के साथ बिगड़ते रिश्ते मिलकर गहरे संकट के संकेत दे रहे हैं। आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि पाकिस्तान इन दबावों से उबरने में कितना सक्षम है, और भारत के साथ उसका भविष्य किस दिशा में जाता है।