Robotic dog history : राजधानी दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा रोबोटिक कुत्तों की हो रही है. समिट परिसर में घूमते इन चार पैरों वाले मशीनों ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. इसको लेकर यह सवाल भी किया जा रहा कि टेक कंपनियां बार-बार रोबोटिक डॉग ही क्यों बनाती हैं? आखिर रोबोटिक बिल्ली, शेर या कोई अन्य जानवर क्यों नहीं होते?
रोबोटिक डॉग का इतिहास
जानकारों की मानें तो इसका जवाब विज्ञान, भावनात्मक जुड़ाव, बाजार की मांग और बड़े निवेश से जुड़ा है. दरअसल, रोबोटिक कुत्तों का सफर नया नहीं है. 1940 में John Hays Hammond Jr. ने स्पार्को नाम से पहली बार एक रोबोटिक कुत्ता विकसित किया था. उसके बाद 1968 में University of Southern California के वैज्ञानिकों ने द फोनी पोनी नामक चार पैरों वाला रोबोट तैयार किया, जो तार की मदद से चलता था. रोबोटिक डॉग को व्यावसायिक रूप से बड़ी सफलता 1999 में मिली, जब जापानी कंपनी Sony ने AIBO लॉन्च किया. जापान में बिक्री शुरू होते ही यह कुछ ही मिनटों में यह आउट ऑफ स्टॉक हो गया.
साल 2005 में अमेरिकी कंपनी Boston Dynamics ने BigDog पेश किया. लगभग 154 किलोग्राम वजनी यह रोबोट अमेरिकी सेना के लिए बनाया गया था. लेकिन तेज मोटर अवाज के कारण इसे सैन्य उपयोग से हटा दिया गया. बाद में इसी कंपनी का Spot रोबोटिक डॉग औद्योगिक और आपदा प्रबंधन कार्यों में लोकप्रिय हुआ. आज के दौर में Unitree Robotics और अन्य कंपनियां भी उन्नत रोबोटिक कुत्ते बना रही हैं. एआई इंपैक्ट समिट में प्रदर्शित रोबोटिक डॉग भी एक चीनी कंपनी का उत्पाद बताया गया.
आखिर कुत्ता ही क्यों बनाती है टेक कंपनियां ?
विशेषज्ञ मानते हैं कि कुत्ता इंसानों के साथ हजारों वर्षों से जुड़ा हुआ है. मनोवैज्ञानिक शोधों के अनुसार लोग कुत्तों के प्रति सहज अपनापन महसूस करते हैं. किसी शेर या डायनासोर के आकार की मशीन डर पैदा कर सकती है, जबकि कुत्ते का आकार भरोसा जगाता है. मार्केटिंग विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते जैसे दिखने वाले रोबोट को अस्पताल, दफ्तर या कॉलेज जैसे स्थानों पर आसानी से स्वीकार कर लिया जाता है. ऐसे उत्पादों की ब्रांडिंग और बिक्री अपेक्षाकृत सरल होती है. वैज्ञानिक दृष्टि से भी कुत्ते की संरचना संतुलन और गतिशीलता के लिए उपयुक्त मानी जाती है. चार पैरों का ढांचा उबड़-खाबड़ जमीन पर स्थिरता देता है, जिससे रोबोट को चढ़ाई, तेज गति और कठिन इलाकों में नेविगेशन में मदद मिलती है.
रोबोटिक डॉग का उपयोग और संभावनाएं
रोबोटिक डॉग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं. Spot जैसे मॉडल आपदा प्रबंधन, आग लगने की घटनाओं, भूकंप प्रभावित इलाकों और औद्योगिक निरीक्षण में इस्तेमाल हो रहे हैं. इनमें लगे कैमरे और सेंसर मलबे में फंसे लोगों का पता लगाने में सक्षम बताए जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार युद्ध क्षेत्रों में भी रोबोटिक डॉग का उपयोग बढ़ रहा है. कुछ देशों ने निगरानी और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए इनका इस्तेमाल शुरू किया है. हथियारों से लैस उन्नत रोबोटिक डॉग की कीमत 70 से 80 लाख रुपये तक बताई जाती है. दिल्ली के एआई इंपैक्ट समिट में रोबोटिक कुत्तों की मौजूदगी ने साफ कर दिया है कि भविष्य की रोबोटिक्स में इनकी भूमिका अहम होने वाली है. भावनात्मक जुड़ाव, तकनीकी व्यवहार्यता और व्यावसायिक संभावनाओं के चलते टेक कंपनियों का कुत्ता प्रेम फिलहाल जारी रहने वाला है ,चाहे वह असली हो या मशीन से बना.