नीतीश कुमार के इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए एक महीने में 23 लाख से ज्यादा आवेदन…जानें क्या है बड़ी वजह

Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana : बिहार सरकार की बहुचर्चित दसहजारी योजना (मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना) को लेकर राज्य की महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। आवेदन की समय-सीमा बढ़ाए जाने के बाद महज एक महीने के भीतर इस योजना के तहत 23 लाख से अधिक नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही अब तक इस योजना के लिए कुल आवेदनों की संख्या करीब 1.8 करोड़ तक पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन आवेदनों में बड़ी संख्या महिलाओं की है और अधिकारियों का कहना है कि योजना की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, खासकर शहरी इलाकों (Bihar News ) में इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है।

शहरी क्षेत्रों से सबसे ज्यादा आवेदन

आधिकारिक जानकारी के अनुसार हालिया 23 लाख आवेदनों में से करीब 18 लाख आवेदन शहरी क्षेत्रों से आए हैं। इनमें से लगभग 5 लाख आवेदन केवल पिछले एक महीने में दर्ज किए गए। इससे साफ है कि शहरी महिलाओं में भी स्वरोजगार को लेकर रुचि तेजी से बढ़ी है। ज्ञात हो कि सरकार पहले ही 1.44 करोड़ महिलाओं को योजना के तहत ₹10,000 की पहली किस्त प्रदान कर चुकी है। यह राशि महिलाओं को छोटे स्तर पर रोजगार शुरू करने के लिए दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि यह राशि लोन नहीं है और इसे वापस नहीं करना होगा।

योजना के तहत कितनी मिल सकती है मदद?

हालांकि योजना को लेकर यह भ्रम भी फैला है कि सभी लाभार्थियों को ₹2 लाख से अधिक की रकम दी जाएगी। लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ₹2.10 लाख तक की सहायता सभी को समान रूप से नहीं मिलेगी। यह राशि महिलाओं की व्यवसायिक योजना की व्यवहारिकता के आधार पर अलग-अलग चरणों में दी जाएगी। यानी जो महिलाएं अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सफल होंगी, उन्हें आगे की सहायता मिल सकती है।

स्वयं सहायता समूहों के जरिए हो रहा क्रियान्वयन

जानकारी के लिए बता दें कि सरकार अपने इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन राज्य के जीविका (JEEViKA) नेटवर्क और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कर रही है। महिलाएं इसके तहत मुर्गी पालन, मछली पालन, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, कृषि आधारित कार्य समेत अन्य स्वरोजगार गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। ताकी उन्हें सरकार से यह लाभ प्राप्त हो सकेगा.

2 करोड़ से ज्यादा महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य

बिहार सरकार का दावा है कि राज्य की जनसंख्या संरचना को देखते हुए आने वाले समय में 2 करोड़ से अधिक महिलाएं इस योजना के दायरे में आ सकती हैं। सरकार इसे महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। गौरतलब है कि यह योजना विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई थी और इसे सत्तारूढ़ गठबंधन की बड़ी योजनाओं में से एक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं के बीच इस योजना की लोकप्रियता का चुनावी असर भी देखने को मिला। जिसके कारण एक बार फिर से नीतीश कुमार 200 से अधीक विधायकों के समर्थन से मुख्यमंत्री बनें.

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