Bihar politics : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी संकेत सामने आया है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस के भीतर उठ रही असहजता अब खुलकर सामने आ गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD के साथ रहकर कांग्रेस को सिर्फ नुकसान ही हुआ है. शकील अहमद का कहना है कि गठबंधन की राजनीति में कांग्रेस को न तो अपेक्षित सीटें मिलीं और न ही संगठनात्मक तौर पर पार्टी मजबूत हो पाई. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिहार में कांग्रेस की सीटें भी घटी हैं और उसकी राजनीतिक साख को भी नुकसान पहुंचा है.
दिल्ली मंथन के बाद आया बड़ा बयान
बताया जा रहा है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ बिहार की राजनीतिक स्थिति को लेकर मंथन हुआ है. इसी मंथन के बाद शकील अहमद ने संकेत दिए हैं कि अब बिहार में कांग्रेस RJD के साथ आगे राजनीति करने के मूड में नहीं है. शकील अहमद ने यह भी इशारा किया कि पार्टी अब राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करने पर फोकस करेगी. उनके मुताबिक, बार-बार जूनियर पार्टनर की भूमिका निभाने से कांग्रेस को चुनावी लाभ नहीं मिला है.
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क्या प्रशांत किशोर के साथ बढ़ेगी नजदीकी?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस अब बिहार में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ किसी नए राजनीतिक प्रयोग की ओर बढ़ेगी? प्रशांत किशोर पहले ही बिहार में वैकल्पिक राजनीति का दावा कर चुके हैं और ऐसे में कांग्रेस का RJD से दूरी बनाना कई नए सियासी समीकरणों को जन्म दे सकता है. शकील अहमद के इस बयान को सिर्फ व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर बदलते राजनीतिक रुख का संकेत माना जा रहा है. आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि बिहार की राजनीति में कांग्रेस ,पुराने गठबंधनों के साथ या किसी नए प्रयोग की ओर किस दिशा में कदम बढ़ाती है.
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