BPSC प्रदर्शन मामले में प्रशांत किशोर के खिलाफ FIR, गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज

पटना।बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन में बिहार के राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) और उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि प्रशांत किशोर ने अभ्यर्थियों को उकसाया और उन्हें सड़क पर हंगामा करने के लिए प्रेरित किया. इसके चलते पुलिस ने उनके खिलाफ कई गंभीर धाराएं लगाई हैं. इस मामले में प्रशांत किशोर के अलावा 19 से अधिक नामजद और 600 से अधिक अज्ञात लोगों को अभियुक्त बनाया गया है.

Prashant Kishore पर गंभीर आरोप

पटना के जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रदर्शन के दौरान हुई अव्यवस्था और कानून-व्यवस्था के उल्लंघन के कारण ये कार्रवाई की गई है. जिलाधिकारी के अनुसार, मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है. प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) की पार्टी “इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी” (IPAC) ने बिहार में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है और वे लगातार राज्य सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं. उनके नेतृत्व में कई आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन हो चुका है, जिनमें युवा और छात्र वर्ग प्रमुख रूप से शामिल हो रहे हैं.

अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, सरकार से बातचीत की मांग

बिहार में BPSC अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन पिछले कई दिनों से जारी था. ये अभ्यर्थी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए थे और सरकार से तत्काल बातचीत की उम्मीद कर रहे थे. रविवार को गांधी मैदान से इन अभ्यर्थियों ने मार्च शुरू किया, जिसमें प्रशांत किशोर की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी उनके साथ थे. उनका मकसद था कि नीतीश कुमार सरकार से बातचीत हो ताकि उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जा सके.

लेकिन जब अभ्यर्थी गांधी मैदान से आगे बढ़े, तो पटना पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की. हालांकि, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी इन बैरिकेड्स को तोड़ते हुए आगे बढ़ते गए. इस बीच पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज किया और पानी की बौछारें भी कीं. प्रदर्शनकारी अंततः जेपी गोलंबर तक पहुंचे, जहां उन्हें पुलिस ने पूरी तरह से रोक लिया और वहां से हटने के लिए मजबूर कर दिया.

प्रशांत किशोर का बयान: “लड़ाई लंबी चलेगी”

प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने गांधी मैदान में प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “एक दिन के नारे से कुछ नहीं होने वाला है. बिहार में छात्रों का जीवन कई सालों से बर्बाद हो रहा है. यह लड़ाई लंबी चलेगी और इसे अंजाम तक पहुंचाना होगा.” उन्होंने अपने संबोधन में किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे किसान दिल्ली में सालों तक डेरा डाले रहे और तब जाकर उनके मुद्दे पर ध्यान दिया गया. किशोर ने कहा, “अगर बिहार में डोमिसाइल नीति में बदलाव, पेपर लीक और नौकरियों में भ्रष्टाचार को खत्म करना है, तो बिहार के छात्रों को एकजुट होकर अपनी लड़ाई लड़नी होगी.”

आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों की दिक्कतें

BPSC अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि पिछले कई महीनों से वे अपनी समस्याओं का समाधान नहीं करवा पाए हैं. बीते कुछ महीनों में कई बार पेपर लीक की घटनाएं और परीक्षा में अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनके खिलाफ अभ्यर्थी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार से बातचीत की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो उनका आंदोलन और भी तेज हो सकता है.

मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह कहना मुश्किल नहीं होगा कि यदि सरकार और प्रशासन जल्द इस मुद्दे का समाधान नहीं निकालते हैं, तो बिहार में छात्र आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है. वहीं, प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी का इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होना, राज्य की राजनीति में भी एक नया मोड़ ला सकता है.

बिहार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं. कई प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया था. अब देखना यह होगा कि इस विवाद के बाद बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्या यह आंदोलन और अधिक राजनीतिक रूप से प्रभावी हो सकता है.

मामले की आगे की जांच

जिलाधिकारी ने मामले की जांच जारी रहने की जानकारी दी और यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) और अन्य अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्होंने न केवल कानून को तोड़ा, बल्कि छात्रों को भी उकसाया और सरकार के खिलाफ माहौल बनाया.

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