पटना। बिहार में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले, हाल ही में स्थापित जनसुराज पार्टी (Jansuraj Party) को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के दो प्रमुख नेता मोनाजिर हसन और देवेंद्र प्रसाद यादव ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. दोनों नेताओं ने कोर कमेटी से इस्तीफा दे दिया है. इस फैसले की कोई स्पष्ट वजह अब तक सामने नहीं आई है. महज कुछ महीने पहले पार्टी में शामिल हुए इन नेताओं को पार्टी की ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण की रणनीति के तहत महत्वपूर्ण माना जा रहा था.
अब तक Jansuraj Party का सफर
जनसुराज पार्टी (Jansuraj Party) की स्थापना मशहूर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) पर की थी. प्रशांत किशोर, जो I-PAC के संस्थापक भी हैं, ने चुनावी रणनीति से खुद को अलग करते हुए बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लिया.
जनसुराज ने हाल ही में बिहार विधानसभा के उपचुनाव में पहली बार चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता हासिल नहीं कर पाई. पार्टी को एक नई राजनीतिक ताकत के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इन इस्तीफों ने पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है.
मोनाजिर हसन: एक अनुभवी नेता
मोनाजिर हसन बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं और उन्हें एक मंझे हुए नेता के रूप में जाना जाता है. हसन ने जेडीयू और आरजेडी जैसे दलों में अहम भूमिकाएँ निभाई हैं. वे लालू यादव और नीतीश कुमार की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं. 2009 में बेगूसराय लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर हसन ने इतिहास रचा था.
हसन 1995 से 2009 तक चार बार मुंगेर विधानसभा सीट से विधायक रहे. 2009 में बेगूसराय लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर हसन ने इतिहास रचा था. वे इस सीट से जीतने वाले पहले मुस्लिम नेता बने. वे 1997 से 2004 तक राष्ट्रीय जनता दल की यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे.
जनसुराज में शामिल होने से पहले हसन ने जेडीयू से इस्तीफा दिया और कुछ समय उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल का भी हिस्सा रहे. इस साल 22 जुलाई को जनसुराज जॉइन करने के बाद, वे ज्यादा समय तक पार्टी में नहीं टिक पाए और अब इस्तीफा दे चुके हैं. हसन की मुस्लिम समुदाय में मजबूत पकड़ है और उन्हें बिहार की राजनीति में एक अनुभवी खिलाड़ी माना जाता है.
देवेंद्र यादव: मिथिलांचल के बड़े समाजवादी नेता
देवेंद्र प्रसाद यादव मिथिलांचल क्षेत्र के प्रभावशाली समाजवादी नेता हैं. वे झंझारपुर से 5 बार सांसद रहे और केंद्र में मंत्री पद पर भी कार्यरत रहे. 1977 में पहली बार विधायक बने यादव ने कर्पूरी ठाकुर के लिए अपनी सीट खाली कर दी थी. इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिकाएँ निभाईं. वे झंझारपुर से 1989 से 1998 तक और 1999 से 2009 तक सांसद रहे. उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समाजवादी विचारधारा के कारण क्षेत्र में अच्छी खासी पहचान बनाई है.
देवेंद्र यादव ने जेडीयू और आरजेडी जैसी पार्टियों में काम किया है और उन्हें लालू प्रसाद यादव का करीबी माना जाता था. 1996 में, जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए मुलायम सिंह यादव का समर्थन किया, तो लालू यादव के साथ उनके संबंध बिगड़ गए.
अगस्त 2024 में देवेंद्र यादव ने जनसुराज पार्टी का दामन थामा था, लेकिन अब पार्टी से उनका मोहभंग हो गया है. यादव का मिथिलांचल क्षेत्र में बड़ा जनाधार है और वे एक समर्पित समाजवादी नेता माने जाते हैं.
M-Y समीकरण और पार्टी पर प्रभाव
जनसुराज पार्टी ने मोनाजिर हसन और देवेंद्र यादव को अपनी रणनीति के ‘M-Y’ फैक्टर के हिस्से के रूप में देखा था. इन नेताओं का इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है. दोनों नेता लंबे समय से बिहार की राजनीति का हिस्सा रहे हैं और उनकी जमीनी पकड़ मजबूत मानी जाती है.
इन इस्तीफों से प्रशांत किशोर और जनसुराज पार्टी (Jansuraj Party) की रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और पार्टी को अपने नए नेतृत्व और संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत करना होगा. क्या प्रशांत किशोर इन झटकों से उबरकर पार्टी को एक नई दिशा दे पाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा.