पटना। महाकुंभ 2025 के दौरान 29 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान के दौरान हुई भगदड़ को लेकर सियासत तेज हो गई है. हादसे में कई श्रद्धालुओं की मौत की खबर सामने आई हैं, लेकिन सही आंकड़ों को लेकर विवाद जारी है. विपक्ष लगातार योगी सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे अनावश्यक राजनीति करार दे रहा है.राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा (Manoj Jha) ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया
Manoj Jha ने उठाया सवाल
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा (Manoj Jha) ने सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि महाकुंभ पहले भी था और आगे भी रहेगा, लेकिन सरकारें आती-जाती रहेंगी. सवाल यह है कि आखिर कितनी जाने गईं? लोग जवाबदेही चाहते हैं. इतनी बड़ी त्रासदी हुई और सदन को इस पर अनभिज्ञ रखना, पूरे देश को अनभिज्ञ रखने जैसा है. मनोज झा (Manoj Jha) ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं और सरकार को इसकी पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
महाकुंभ भगदड़ मामले की निष्पक्ष जांच और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया. याचिका में केंद्र और सभी राज्यों को पक्ष बनाया गया था, जिसमें सरकार को मिलकर महाकुंभ में सुरक्षा पुख्ता करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की गई थी.
सियासी घमासान और सरकार का रुख
महाकुंभ में हुई भगदड़ को लेकर बीजेपी सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और इसे राजनीति से प्रेरित बताया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार ने महाकुंभ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है. हालांकि विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं है और हादसे में मारे गए लोगों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है.
अब सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और क्या सरकार महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर नए दिशानिर्देश जारी करेगी? विपक्ष लगातार सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहा है.