Bihar MLC elections 2026 : बिहार विधान परिषद (MLC) की 10 सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले अटकलों का दौर तेज हो गया है. सियासी गलियारों में इस बार चुनावी मुकाबले से ज्यादा चर्चा राजनीतिक दलों में नेताओं के परिजनों को टिकट देने की संभावनाओं को लेकर हो रही है. राजनीतिक जानकारों का दावा है कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) दोनों ही खेमों में कई राजनीतिक परिवारों के सदस्यों का एमएलसी बनने की ज्यादा संभावना हैं.
एनडीए में कई दिग्गजों के परिजनों की दावेदारी
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar के पुत्र और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री Nishant Kumar को जनता दल (यू) की ओर से विधान परिषद भेजे जाने की लगभग तैयारी पूरी मानी जा रही है. वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख और राज्यसभा सांसद Upendra Kushwaha के पुत्र तथा पंचायती राज मंत्री Deepak Prakash को भी पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाया जा सकता है. वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में भी टिकट को लेकर परिवार के भीतर कई नाम चर्चा में हैं. केंद्रीय मंत्री और पार्टी प्रमुख Chirag Paswan को अपने भतीजे Seemant Mrinal, बहनोई Ved Prakash Pandey और पूर्व एमएलसी Hulash Pandey में से किसी एक के नाम पर फैसला करना है. इसी तरह हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi अपने पुत्र Praveen Kumar Suman को विधान परिषद भेजने के प्रयास में जुटे हैं. उनके बड़े पुत्र Santosh Kumar Suman पहले से एमएलसी और मंत्री हैं, जबकि बहू Deepa Manjhi विधानसभा सदस्य हैं.
राजद में परिवार बनाम संगठन की दुविधा
विपक्षी राजद के सामने भी टिकट वितरण को लेकर चुनौती कम नहीं है. पार्टी नेतृत्व के सामने पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi और राजद सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav के बड़े पुत्र Tej Pratap Yadav तथा पुत्री Rohini Acharya में से किसी एक को प्राथमिकता देने का सवाल खड़ा हो गया है. राजद के निवर्तमान एमएलसी Sunil Singh भी दावेदारों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं. हालांकि राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि यदि तेज प्रताप यादव को एमएलसी उम्मीदवार बनाया जाता है तो उन्हें अपनी पार्टी जनशक्ति जनता पार्टी का विलय या वापसी कर राजद में शामिल होना पड़ सकता है. वहीं हाल के महीनों में परिवार के भीतर मतभेदों की चर्चाओं के बीच रोहिणी आचार्य को टिकट देकर पारिवारिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है.
बिहार विधान परिषद में सीटों का गणित
बिहार विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के आधार पर एनडीए के लिए नौ सीटें जीतना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि विपक्षी राजद को एक सीट से संतोष करना पड़ सकता है. चुनाव जीतने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी. 75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद में 27 सदस्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक चुनते हैं. इसके अलावा 12 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं. स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि 24 सदस्यों का चुनाव करते हैं, जबकि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से छह-छह सदस्य चुने जाते हैं.
वंशवाद बनाम राजनीतिक संतुलन
एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे का समीकरण भी लगभग स्पष्ट माना जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यू) में से एक दल को चार सीटें मिल सकती हैं, जबकि दूसरे को तीन सीटों पर संतोष करना होगा. यदि दोनों बड़े दल तीन-तीन उम्मीदवार उतारने पर सहमत होते हैं तो शेष तीन सीटें एलजेपी (आरवी), हम (एस) और आरएलएम को एक-एक मिल सकती हैं. इस चुनाव ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में वंशवाद की बहस को केंद्र में ला दिया है. लगभग सभी प्रमुख दलों में नेताओं के पुत्र, पुत्री, रिश्तेदार या परिवार के अन्य सदस्य टिकट की दौड़ में हैं.