NDA government : बिहार चुनाव में नीतीश सरकार को प्रचंड बहुमत मिला है. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम में भाजपा सबसे मजबुत पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि जदयू भी उसके कदम से कदम बढ़ाकर चल रही है. लेकिन जो आंकड़े है उसका एख बड़ा राजनीतिक संकेत भी यह है कि बीजेपी पहली बार बिहार में अपने बूते सरकार बनाने के बेहद करीब पहुंच गई है. हालांकि इसकी संभावना नहीं के बराबर है कि भाजपा अपने बुते सरकार बनाए लेकिन नीतीश कुमार की आदत को देखते हुए इसे पूरी तरह से नाकारा नहीं जा सकता है.
बीजेपी अकेले अपने दम पर सरकार के नजदीक
परिणाम के अनुसार एनडीए में सीटों का बंटवारा इस प्रकार है
- बीजेपी: 91
- जदयू: 83
- एलजेपी (रामविलास): 19
- हम (HAM): 5
- आरएलएम (उपेंद्र कुशवाहा): 4
अगर नीतीश कुमार को एनडीए के समीकरण से अलग कर दिया जाए, तब भी बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ 119 सीटें जुटा रही है. बहुमत के लिए 122 सीटें चाहिए, यानी बीजेपी को केवल 3 और विधायकों की जरूरत है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक आसानी से संभव मान रहे हैं.
नीतीश के बिना एनडीए का समीकरण
- बीजेपी: 91
- एलजेपी (रामविलास): 19
- HAM: 5
- RLM: 4
कुल: 119 सीट
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बीजेपी कांग्रेस, लेफ्ट या बसपा के विधायकों को जोड़कर आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सकती है.
क्या बीजेपी ऐसा कदम उठाएगी?
एक्सपर्ट्स की राय माने तो बीजेपी जोड़-तोड़ की राजनीति में माहिर है केंद्र में सरकार होने के कारण राज्यपाल भी उसी का है. ऐसे में अगर नीतीश कुमार एनडीए से अलग होते हैं तो बीजेपी कांग्रेस या अन्य दलों के विधायकों को अपने साथ मिलाकर सरकार बनाने में देर नहीं लगाएगी. कई पॉलिटिकल एनालिस्ट का मानना है बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. उसके लिए 8-10 विधायकों का इंतजाम करना कोई बड़ी चुनौती नहीं है. गठबंधन धर्म की मजबूरी न होती तो बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने की कवायद पहले ही शुरू कर देती. हालांकि सीट बंटवारे के समय से ही यह साफ था कि बीजेपी अपनी रणनीति अलग रखे हुए है. आज के नतीजे दिखाते हैं कि वह रणनीति सफल रही है. CM चेहरे को लेकर बीजेपी की कैल्कुलेटेड चुप्पी रखा है और चुनाव के दौरान बीजेपी ने नीतीश कुमार को लेकर मिश्रित संकेत दिए है.
क्या है बिहार के जनादेश का मतलब
बिहार का जनादेश इस बार न सिर्फ सत्ता के पलटने का संकेत दे रहा है बल्कि राज्य की गठबंधन राजनीति में एक बड़े दौर के बदलाव भी शुरुआत दिखाता है. बीजेपी पहली बार बिहार में लीड पार्टी बनकर उभरी है. नीतीश कुमार की सत्ता पर पकड़ कमजोर होती दिख रही है. एनडीए के भीतर सत्ता संतुलन तेजी से बदल रहा है. आने वाले घंटों में यह तय होगा कि बिहार में सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी, लेकिन इतना तय है कि 2025 का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए ऐतिहासिक पड़ाव साबित होने जा रहा है.