Bihar Solar Farming : बिहार में सौर ऊर्जा को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने ग्रीन एनर्जी अभियान को तेज कर दिया है. खेतों, बंजर जमीनों, डैम, तालाबों और नदियों से लेकर निजी घरों व सरकारी दफ्तरों की छतों तक सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं. राज्य सरकार का लक्ष्य अगले एक वर्ष में सौर ऊर्जा उत्पादन को वर्तमान 500–600 मेगावाट से बढ़ाकर 4,000 मेगावाट तक पहुंचाना है.
सब्सिडी पर बड़ा खर्च उपभोक्ताओं को राहत
राज्य में हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए सरकार अपनी वितरण कंपनियों North Bihar Power Distribution Company Limited (NBPDCL) और South Bihar Power Distribution Company Limited (SBPDCL) को भारी सब्सिडी दे रही है. किसानों को 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को 8–9 रुपये प्रति यूनिट की वास्तविक लागत से काफी कम दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने 15,995 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी. 2026-27 में यह राशि बढ़कर 16,500 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है.
पंचायतों में 12 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत सभी पंचायतों में 12 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का लक्ष्य रखा गया है. अब तक 9.10 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई जा चुकी हैं. इसके साथ साथ राज्य के किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से फीडर लेवल सोलराइजेशन योजना लागू की गई है. इस योजना के तहत प्रति मेगावाट 1.5 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 45 लाख रुपये राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है. इससे कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा, जिससे पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता घटेगी.
सरकारी भवनों की छतों पर रूफटॉप सोलर
Jal-Jeevan-Hariyali Abhiyan के तहत राज्य के सभी सरकारी भवनों की छतों पर ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाए जा रहे हैं. करीब 13 हजार सरकारी भवनों स्कूल, ई-किसान भवन, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की छतों पर 119 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं. अगले पांच वर्षों में 500 मेगावाट रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य तय किया गया है. वहीं BPL परिवारों को मुफ्त में सोलर प्लांट लगाने की सुविधा दी जाएगी. Kutir Jyoti Yojana के तहत बीपीएल श्रेणी के परिवारों को मुफ्त में सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं. इस योजना के अंतर्गत 2.5 लाख उपभोक्ताओं की छतों पर 1.1 किलोवाट क्षमता का सौर संयंत्र स्थापित किया जाएगा. जमीन की कमी को देखते हुए सरकार ने अब जलाशयों का उपयोग शुरू किया है. तालाबों में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिससे भूमि अधिग्रहण की समस्या कम होगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा.
सौर ऊर्जा से क्या होगा फायदा?
बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा के उत्पादन से लोगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी, वितरण कंपनियां रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) लक्ष्य हासिल कर सकेंगी, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) लॉस में कमी आएगी, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटेगा और कोयले की खपत में भी कमी आएगी. बिहार में बिजली की खेती का यह मॉडल न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में भी अहम पहल है.