Prashant kishor : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का परिणाम प्रशांत किशोर की जन सुराज के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी. जिसके बाद अब पार्टी के पास विधानसभा में अपनी मौजुदगी दर्ज कराने का एक और मौका है. हालांकि उससे पहले प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी जन सुराज का मुख्यालय पटना शहर से बाहर बिहटा में स्थापित कर बिहार की राजनीति में लंबी पारी खेलने का संकेत दिया है. करीब 15-20 एकड़ में फैले इस नए परिसर को लेकर चर्चा है कि यहीं से वह आने वाले वर्षों में जमीनी राजनीति की रणनीति तैयार करेंगे. फिलहाल बिहार में कोई बड़ा चुनाव नहीं है, लेकिन पंचायत चुनाव और संभावित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.
उपचुनाव से पहले पंचायत चुनाव पर फोकस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा में जनसुराज के खराब प्रदर्शन का एक कारण यह भी रहा कि पार्टी जमीनी स्तर पर उतनी मजबुत नहीं दिख रही थी जितना की सोशल मीडिया पर. इसलिए फिलहाल तो पार्टी की पहली बड़ी रणनीति पंचायत स्तर पर संगठन खड़ा करना हो सकता है. बिहार में 8,000 से अधिक पंचायतें हैं. यदि पार्टी बड़ी संख्या में मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को अपने साथ जोड़ने में सफल होती है, तो यह भविष्य के विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है. जानकार इसकी जरूरत इसलिए मानते हैं क्योंकि 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा. पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 236 सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. पार्टी का कुल वोट शेयर लगभग 3.44% रहा. हालांकि पार्टी को करीब 16 लाख वोट मिले, लेकिन कई सीटों पर उम्मीदवारों को NOTA से भी कम वोट प्राप्त हुए. यही वजह है कि अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन और विश्वसनीयता को दोबारा खड़ा करने की है.
बांकीपुर सीट क्यों महत्वपूर्ण?
पंचायत चुनाव के साथ साथ बांकीपुर सीट के लिए होने वाले उपचुनाव भी इसलिए चर्चा में है क्योंकि सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के विधानसभा से इस्तीफे के बाद खाली हुई है. माना जा रहा है कि जुलाई-अगस्त तक यहां उपचुनाव हो सकता है. पिछले चुनाव में नितिन नवीन को करीब 98 हजार वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर रही राजद उम्मीदवार को लगभग 46 हजार वोट मिले थे. भाजपा ने यहां 51 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी को यहां 7,717 वोट मिले थे, जो लगभग 4.57% वोट शेयर था. यह पार्टी के राज्यव्यापी औसत 3.44% से बेहतर प्रदर्शन है.
क्या प्रशांत किशोर को खुद चुनाव लड़ना चाहिए?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यदि प्रशांत किशोर खुद बांकीपुर से चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो इससे पार्टी को बड़ा राजनीतिक और मीडिया मोमेंटम मिल सकता है. बांकीपुर को पटना का बौद्धिक और शहरी क्षेत्र माना जाता है. यहां शिक्षित मतदाताओं, छात्रों और कोचिंग संस्थानों की बड़ी संख्या है. हालांकि यह सीट लंबे समय से भाजपा का गढ़ रही है और कायस्थ बहुल मानी जाती है, फिर भी राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि प्रशांत किशोर यहां अपनी पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ाने में सफल हो सकते हैं.
संगठन को नई ऊर्जा देने की कोशिश
2025 चुनाव में एक बड़ी आलोचना यह भी रही कि प्रशांत किशोर खुद चुनाव नहीं लड़े. उनके राघोपुर से चुनाव लड़ने की चर्चा थी, लेकिन अंतिम समय में उन्होंने मैदान में उतरने से परहेज किया. इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ा. ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव उनके लिए सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक विश्वसनीयता और संगठनात्मक पुनर्निर्माण की परीक्षा माना जा रहा है. इससे इतर विश्लेषकों का मानना है कि 2029 लोकसभा चुनाव और 2030 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं. ऐसे में जन स्वराज के पास संगठन मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय है.